Share This Article रायपुर, 14 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने देश के नवनिर्मित राष्ट्रीय रक्षा क्रांति संग्रहालय का उद्घाटन करते हुए अपनी सबसे आधुनिक परमाणु मिसाइलों का प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘ह्वासोंग-20Ó अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उत्तर कोरिया की इस मिसाइल को अमेरिका के मुख्य भूभाग तक परमाणु हमला करने में सक्षम बताया जा रहा है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में किम जोंग उन से मुलाकात की संभावना के संकेत दिए हैं। संग्रहालय में प्रदर्शित एक विश्व मानचित्र के माध्यम से उत्तर कोरिया की मिसाइलों की संभावित मारक क्षमता को दर्शाया गया है। मानचित्र में मिसाइलों की पहुंच अमेरिका के मुख्य भूभाग के अलावा मध्य पूर्व, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका तक दिखाई गई है। इस प्रदर्शन के जरिए उत्तर कोरिया ने अपनी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की क्षमता और सैन्य शक्ति को प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। कोरिया रक्षा और सुरक्षा मंच के महानिदेशक शिन जोंग-वू के अनुसार, ह्वासोंग-20 की बनावट और डिजाइन से संकेत मिलता है कि यह एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने तथा अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता से लैस हो सकती है। हालांकि, मिसाइल की वास्तविक परिचालन क्षमता और इससे जुड़े दावों का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है। शिन जोंग-वू ने कहा कि यह प्रदर्शनी किम जोंग उन के रक्षा विज्ञान विकास कार्यक्रम की उपलब्धियों को उजागर करने के उद्देश्य से तैयार की गई प्रतीत होती है। उनके अनुसार, यह उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच संभावित शिखर वार्ता से पहले रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए किया गया प्रचार प्रयास भी हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय रक्षा क्रांति संग्रहालय के माध्यम से किम जोंग उन उत्तर कोरिया की हथियार प्रणालियों और सैन्य उपलब्धियों को शासन की शक्ति के स्थायी प्रतीकों के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। संग्रहालय में आधुनिक मिसाइलों का प्रदर्शन देश की सैन्य क्षमताओं को घरेलू जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वाशिंगटन में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा था कि वह 18 और 19 नवंबर को चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए एशिया की यात्रा कर सकते हैं। इस दौरान किम जोंग उन के साथ बातचीत की संभावना भी जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं का प्रदर्शन करके संभावित वार्ता से पहले अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। ह्वासोंग-20 को राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रमुखता से प्रदर्शित करना इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इससे उत्तर कोरिया अपनी सैन्य शक्ति का संदेश देने के साथ अमेरिका के साथ किसी भी संभावित बातचीत में अधिक प्रभाव हासिल करने का प्रयास कर सकता है। Share This Article Post navigation चुनाव से पहले ईरान पर हमले की तैयारी? ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत से बढ़ी हलचल