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रायपुर, 16 अक्टूबर 2026/ ETrendingIndia / येस बैंक को ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए येस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने मार्च 2020 में इन बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने के फैसले को अमान्य करार दिया था।

क्या है पूरा मामला?

मार्च 2020 में वित्तीय संकट के बीच RBI ने येस बैंक पर रोक लगाई थी। इसके बाद बैंक के ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ यानी समाप्त कर दिया गया था। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि बैंक के प्रशासक ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की। पुनर्गठन योजना लागू होने के बाद बॉन्ड को राइट-ऑफ करने का अधिकार नहीं था।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से बॉन्ड पर सालाना ब्याज भुगतान प्रभावित नहीं होगा। संबंधित दस्तावेजों के अनुसार भुगतान जारी रखना होगा।

क्या होते हैं AT-1 बॉन्ड?

AT-1 बॉन्ड बैंक पूंजी जुटाने के लिए जारी करते हैं। ये स्थायी प्रकृति के ऋण साधन होते हैं और वित्तीय संकट के दौरान इनमें नुकसान का जोखिम अधिक हो सकता है।


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