Share This Article रायपुर, 16 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में उनकी संलिप्तता दर्शाते हैं। अदालत ने माना कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत जमानत के लिए निर्धारित शर्तें पूरी नहीं होती हैं। सोनवानी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसका प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विरोध किया। इससे पहले रायपुर की विशेष अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ईडी के अनुसार, सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया गया था। मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्लू) ने फरवरी 2024 में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद सीबीआई ने भी जांच कर आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किए। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के लेनदेन का आरोप ईडी का आरोप है कि 14 जुलाई 2021 को भर्ती नियमों में संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजे शब्द हटाया गया, जिसके बाद सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी का क्रमश: डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चयन हुआ। एजेंसी ने बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की ओर से ग्रामीण विकास समिति को कथित शैक्षणिक परियोजना के लिए सीएसआर मद में 45 लाख रुपये दिए जाने का भी उल्लेख किया है। ईडी ने दावा किया है कि मामले में 33 से अधिक अभ्यर्थियों से लगभग तीन करोड़ रुपये जुटाए गए और कथित अपराध की कुल आय करीब 3.45 करोड़ रुपये है। हालांकि, ये आरोप हैं, जिनका न्यायिक परीक्षण होना बाकी है। तलाशी में नकदी और डिजिटल सामग्री जब्त ईडी के मुताबिक, 3 जून 2026 को तलाशी के दौरान दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल सामग्री और 8.45 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। कथित अपराध की आय से जुड़ी कुछ संपत्तियों के संबंध में 21 सितंबर 2026 को अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया गया। इसके अगले दिन, 22 सितंबर को सोनवानी सहित सात आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई। सोनवानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी ने दलील दी कि जांच एजेंसियों के पास संबंधित दस्तावेज और बैंक लेनदेन पहले से उपलब्ध हैं तथा गिरफ्तारी के बाद कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। मेडिकल आधार पर भी नहीं मिली राहत हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के केवल इनकार करने से मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी संलिप्तता की आशंका समाप्त नहीं हो जाती। मेडिकल आधार पर जमानत के संबंध में अदालत ने कहा कि इसके लिए पर्याप्त साक्ष्य होना चाहिए कि हिरासत में जरूरी उपचार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है या आरोपी की जान को खतरा है। रिकॉर्ड में इस संबंध में पर्याप्त मेडिकल सामग्री नहीं पाई गई।इन परिस्थितियों और पीएमएलए की धारा 45 के तहत निर्धारित कानूनी शर्तों को देखते हुए हाईकोर्ट ने टामन सिंह सोनवानी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। Share This Article Post navigation मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात