Kartala Forest RangeKartala Forest Range
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कोरबा, 20 अक्टूबर 2026। Kartala Forest Range : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम सजापानी में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी सुखद खबर सामने आई है। यहां एक मादा हाथी ने शावक को जन्म दिया है। वन विभाग को मंगलवार सुबह करीब 6 बजे गश्त और हाथी ड्यूटी के दौरान इसकी जानकारी मिली। इसके बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई और नवजात शावक समेत पूरे हाथी झुंड की सुरक्षा के लिए निगरानी शुरू कर दी गई।

सुबह गश्त के दौरान मिली जानकारी

वन विभाग के कर्मचारियों को सजापानी गांव के पास हाथी के शावक के जन्म की जानकारी मिली। इसके बाद मैदानी अमले ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। विभाग की प्राथमिकता मादा हाथी और नवजात शावक को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के झुंड के साथ रह सकें।

ड्रोन कैमरे से हो रही निगरानी

हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ड्रोन कैमरे की मदद ले रहा है। विभागीय टीम भी मौके पर मौजूद है। निगरानी के जरिए हाथियों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी संभावित खतरे को समय रहते पहचाना जा सके।

ग्रामीणों को जंगल में जाने से बचने की सलाह

हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए आसपास के गांवों में मुनादी कराई जा रही है। ग्रामीणों से जंगल की ओर जाने से बचने, हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और विभागीय निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। खासकर जलाऊ लकड़ी, पत्ते और लघु वनोपज लेने जंगल जाने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

नवजात शावक के पास भीड़ लगाने से बचें

शावक के जन्म के बाद मादा हाथी और उसका झुंड संवेदनशील स्थिति में हो सकता है। ऐसे में हाथियों के करीब जाना, उन्हें भगाने की कोशिश करना, तेज आवाज करना या तस्वीरें लेने के लिए भीड़ जुटाना खतरनाक हो सकता है। वन विभाग ने लोगों से वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप नहीं करने और हाथियों की गतिविधि दिखने पर सुरक्षित स्थान से विभाग को सूचना देने की अपील की है।

मानव-हाथी संघर्ष रोकने पर जोर

कोरबा के वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही के दौरान मानव और वन्यजीवों की सुरक्षा बनाए रखना महत्वपूर्ण है। समय पर सूचना, मुनादी और विभागीय निगरानी से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। ग्रामीणों से अपुष्ट खबरें सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने और हाथियों से जुड़ी जानकारी सीधे वन विभाग तक पहुंचाने का आग्रह किया गया है।


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