National Saras MelaNational Saras Mela
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रायपुर, 21 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए विजयवाड़ा में राष्ट्रीय सरस मेला आयोजित किया जा रहा है।

31 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेले में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की करीब 1,500 महिला उद्यमी 650 से अधिक स्टॉलों के माध्यम से अपने उत्पाद बेच रही हैं।

दिल्ली-एनसीआर के बाहर आयोजित यह पहला राष्ट्रीय सरस मेला है। इसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने, कारोबार को विस्तार देने और लखपति दीदी अभियान को बढ़ावा देना है।

34 राज्यों की महिलाओं को मिला बड़ा मंच

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नामी घाट पर 13 से 31 अक्टूबर 2026 तक आयोजित मेले में हथकरघा, हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, प्राकृतिक उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यहां महिलाओं को सीधे ग्राहकों से जुड़ने और अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

1999 में हुई थी शुरुआत, सालाना बिक्री ₹200 करोड़ से अधिक

राष्ट्रीय सरस मेले की शुरुआत वर्ष 1999 में दिल्ली में लगभग 65 लाभार्थियों के साथ हुई थी। अब तक 117 राष्ट्रीय सरस मेले आयोजित किए जा चुके हैं, जिनकी वार्षिक बिक्री ₹200 करोड़ से अधिक रही है। देशभर में हर साल लगभग 50 सरस मेले आयोजित किए जाते हैं।

लखपति दीदी अभियान को मिलेगा बढ़ावा

लखपति दीदी ऐसी स्वयं सहायता समूह सदस्य होती हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये होती है और यह आय लगातार बनी रहती है। सरकार ने दिसंबर 2025 तक तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल किया।

फरवरी 2026 में इस लक्ष्य को बढ़ाकर छह करोड़ कर दिया गया। सरस मेले महिलाओं को कारोबार बढ़ाने और आय के स्थायी साधन विकसित करने में मदद करते हैं।

कारोबार बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और सहायता

मेले में विशेष पैवेलियन के जरिए महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग, ऑनलाइन बिक्री, सोशल मीडिया मार्केटिंग और व्यावसायिक योजनाएं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

साथ ही, उन्हें वित्तीय संस्थानों, सरकारी विभागों और संभावित खरीदारों से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है।

50 फूड स्टॉल पर मिलेंगे देशभर के पारंपरिक व्यंजन

इंडिया फूड कोर्ट में 50 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां 28 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 200 से ज्यादा महिला उद्यमी अपने व्यंजन पेश कर रही हैं। यहां बिहार का लिट्टी-चोखा, पंजाब का मक्के का रोटी-साग, हैदराबादी दम बिरयानी और छत्तीसगढ़ का पारंपरिक चौसेला भी उपलब्ध है।

ई-कॉमर्स से देशभर में बिकेंगे ग्रामीण उत्पाद

सरस मेले के साथ ईसरस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी ग्रामीण महिला उद्यमियों को व्यापक बाजार से जोड़ रहे हैं। इससे महिलाएं मेले के बाद भी ऑनलाइन माध्यमों से अपने उत्पाद बेच सकती हैं। मेले में यूपीआई से डिजिटल भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है।

ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरस मेला एक ऐसा मंच बन रहा है, जहां पारंपरिक हुनर को कारोबार में बदलने, ग्राहकों तक पहुंचने और स्थायी आजीविका विकसित करने के अवसर मिलते हैं। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा को भी आगे बढ़ाती है।


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