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रायपुर, 27 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / भारतीय नौसेना के ‘पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन’ (1टीएस) के जहाज — आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस) सारथी — 26 अक्टूबर को श्रीलंका के कोलंबो पहुंचे।

श्रीलंका नौसेना ने नौसैनिक बैंड की उपस्थिति में इन जहाजों का औपचारिक स्वागत किया, जिसके साथ ही इस बंदरगाह यात्रा की शुरुआत हुई।

यह यात्रा दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर बातचीत का अवसर प्रदान करती है, साथ ही ‘पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन’ के साथ प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षुओं के साथ जुड़ने का मौका भी देती है।

पोत के पहुंचने पर, ‘नौसेना प्रशिक्षण महानिदेशक’ और श्रीलंका नौसेना के ‘पूर्वी नौसेना क्षेत्र’ के कमांडर ने जहाजों पर मौजूद प्रशिक्षुओं से बातचीत की।

इस बातचीत के जरिए उन्हें प्रशिक्षुओं से जुड़ने और पेशेवर नौसैनिक प्रशिक्षण के बारे में अपने विचार साझा करने का अवसर मिला।

इस ‘बंदरगाह पर ठहराव’ के दौरान, दोनों नौसेनाओं के कर्मी कई तरह की पेशेवर और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों में हिस्सा लेंगे, जिनमें ‘आपसी-प्रशिक्षण’ के लिए एक-दूसरे के जहाजों का दौरा करना और ‘पैसेज एक्सरसाइज’ (पैसेक्स) शामिल है।

इन गतिविधियों से कर्मियों को पेशेवर ज्ञान साझा करने और एक-दूसरे की कार्यप्रणालियों व प्रक्रियाओं को जानने का अवसर मिलेगा।

साथ ही, इससे दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ेगी और उनके बीच आपसी तालमेल को मजबूती मिलेगी।

बंदरगाह पर ठहराव के दौरान, आम जनता के लिए सामुदायिक संपर्क गतिविधियां और जहाजों का दौरा भी आयोजित किया जाएगा।

यह बंदरगाह पर ठहराव भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चली आ रही समुद्री साझेदारी को दर्शाता है। इसके साथ यह भी पता चलता है कि दोनों देशों की नौसेनाएं पेशेवर जुड़ाव और सहयोग के लिए लगातार प्रतिबद्ध हैं।

यह दौरा भारत के ‘महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) परिकल्पना के अनुरूप भी है, जो समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय समृद्धि के लिए आपसी सहयोग और मिलकर किए जाने वाले प्रयासों पर जोर देता है।


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