Share This Article रायपुर, 29 अक्टूबर 2026/ ETrendingIndia / सरगुजा जिले के चर्चित रिंगबांध जमीन फर्जीवाड़े में मुख्य आरोपी आजाद इराकी को जमानत मिलने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। सरगुजा कलेक्टर आईएएस अजीत बसंत ने आरोपी को जमानत दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखा है। इस पत्र के सामने आने के बाद प्रशासन और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, अंबिकापुर के रिंगबांध क्षेत्र में आदिवासियों की जमीनों की कथित धोखाधड़ी से रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया था। आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य कूटरचित दस्तावेजों के सहारे जीवित लोगों को मृत दर्शाया गया, जबकि कुछ मामलों में मृत व्यक्तियों के कथित फर्जी वारिस खड़े कर जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की गई। इस मामले में पुलिस ने कथित मुख्य सूत्रधार आजाद इराकी के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, आगे की जांच और कार्रवाई के बीच आरोपी को अदालत से जमानत मिल गई। कलेक्टर अजीत बसंत ने अपने पत्र में जमानत की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकारी पक्ष की दलीलें सुने बिना ही आरोपी को राहत दी गई। उन्होंने मामले की गंभीरता का उल्लेख करते हुए आशंका जताई कि आरोपी के जेल से बाहर आने पर साक्ष्यों को प्रभावित करने की स्थिति बन सकती है। इस घटनाक्रम ने एक अहम कानूनी सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या कोई जिला कलेक्टर न्यायालय के किसी आदेश पर इस तरह पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज करा सकता है? प्रशासनिक अधिकारियों के अधिकारों की सीमा क्या है और न्यायिक आदेश को चुनौती देने की निर्धारित प्रक्रिया क्या है? सामान्य कानूनी व्यवस्था में किसी न्यायिक आदेश को चुनौती देने के लिए अपील, पुनरीक्षण या अन्य उपयुक्त न्यायिक उपाय अपनाए जाते हैं। ऐसे में कलेक्टर के पत्र की प्रकृति, उसका कानूनी आधार और इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल, रिंगबांध जमीन फर्जीवाड़े में जमानत को लेकर उठे सवालों के बीच यह मामला अब केवल जमीन घोटाले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार क्षेत्र को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। Share This Article Post navigation बाबा कार्तिक उरांव के नाम पर होगा अंबिकापुर इंजीनियरिंग कॉलेज, मुख्यमंत्री ने की घोषणा; सीतापुर को 28 करोड़ की फोरलेन सड़क की सौगात