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रायपुर, 29 अक्टूबर 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शांति वार्ता दोबारा शुरू करने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के वरिष्ठ नेता मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि क्या दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता निकाला जा सकता है.


मोहसेन रेजाई ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के पूर्व कमांडर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वेंस ने यह पत्र ट्रंप के निर्देश पर भेजा था. इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि राष्ट्रपति को इस पहल की पूरी जानकारी है. यह पहल ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आने वाले हफ्तों में ईरान पर फिर से सैन्य हमला करने की धमकी दी है.

हालांकि, ट्रंप ने इस दावे को खारिज किया है कि उन्होंने वेंस को ईरान के साथ शांति वार्ता शुरू करने का निर्देश दिया था. जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वेंस की बातचीत मेडिकल सप्लाई से जुड़ी थी. ट्रंप के मुताबिक, ईरान को बीमार लोगों की मदद के लिए चिकित्सा सामग्री की जरूरत है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के

ईरान पर सीमित लेकिन जोरदार सैन्य हमला करने पर विचार कर रहे हैं. ऐसे में वेंस की पहल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या बातचीत के जरिए दोनों देशों के बीच फिर से संघर्ष शुरू होने से रोका जा सकता है. हालांकि, अभी तक बातचीत के लिए कोई विस्तृत शांति प्रस्ताव सामने नहीं आया है. दूसरी तरफ, रेजाई ने पिछले हफ्ते कहा था कि जब तक ईरान की बुनियादी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक तेहरान अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेगा.


वेंस के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से युद्ध का समर्थन किया है, लेकिन निजी तौर पर युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने पर आपत्ति जताई थी. फरवरी में ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था. इससे पहले वेंस ने कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने पर जोर दिया था. बाद में ट्रंप ने वेंस को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी. इसके बाद उपराष्ट्रपति ने ईरान के प्रतिनिधियों से समझौता करने के लिए दो बार विदेश यात्रा भी की.


रिपोर्ट के अनुसार, जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता ज्ञापन महज 15 दिन में खत्म हो गया. इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद थे. इसके बाद कतर और पाकिस्तान की मदद से बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश भी सफल नहीं हुई.


अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पहले ही रियायत दे. वहीं, ईरानी अधिकारी तत्काल आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं. इन मतभेदों के कारण दोनों देशों के बीच किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है. रेजाई के बातचीत में अहम भूमिका निभाने से ईरान की मौजूदा कूटनीतिक व्यवस्था में भी बदलाव आ सकता है. इससे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ जैसे नेताओं की भूमिका सीमित हो सकती है.


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