Share This Article रायपुर, 30 अक्टूबर 2026/ ETrendingIndia / वैश्विक बाजार में भारतीय दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में देश का दवा निर्यात सालाना आधार पर 4.9 प्रतिशत बढ़कर 16.14 अरब डॉलर पहुंच गया। यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के बाजारों में मजबूत मांग ने इस वृद्धि को गति दी है। यूरोप और एशियाई बाजारों में बढ़ी मांग भारतीय दवा निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) के आंकड़ों के अनुसार, यूरोप को दवा निर्यात में 9.66 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं आसियान देशों में निर्यात 21.54 प्रतिशत और लैटिन अमेरिका में 16.58 प्रतिशत बढ़ा। अफ्रीकी देशों में भी 6.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बल्क ड्रग्स के निर्यात में 12% उछाल निर्यात में दवाओं के फॉर्मूलेशन और बायोलॉजिकल उत्पादों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 73.84 प्रतिशत रही। इस श्रेणी में 3.81 प्रतिशत वृद्धि हुई। वहीं बल्क ड्रग्स और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे पदार्थों का निर्यात 12.07 प्रतिशत बढ़ा। सर्जिकल उत्पादों के निर्यात में भी 9.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। अमेरिका पर निर्भरता घटाने की जरूरत अमेरिकी बाजार में निर्यात की रफ्तार कुछ धीमी रही, लेकिन दूसरे देशों में बढ़ती मांग ने इसकी भरपाई की। विशेषज्ञों के मुताबिक, शोध, नई तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में निवेश से भारत वैश्विक दवा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। Share This Article Post navigation गुजरात में बढ़ेगा आलू का कारोबार… फ्रेंच फ्राइज प्लांट की क्षमता ढाई गुना होगी