Share This Article रायपुर / 03 नवंबर 2026 / ETrendingIndia / राज्योत्सव के शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विकास विभाग के स्टॉल पर रेशम कीटपालन की प्रक्रिया समझने बड़ी संख्या में किसान एवं आम नागरिक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक रेशम कीड़ों को देखने के लिए भी लोगों में खासा उत्साह दिख रहा है। स्टॉल में रेशम के विभिन्न प्रकारों और उनसे तैयार होने वाले धागों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें मलबरी सफेद कोया, मलबरी रंगीन कोया, मलबरी पीला मैसूर, मलबरी सफेद रिल्ड, टसर स्पन धागा, टसर बाना धागा, डाबा पालित कोसा और रैली साबू बीज प्रमुख हैं। इन धागों का उपयोग कोसा सिल्क, मलबरी सिल्क के साथ-साथ बनारसी एवं कांजीवरम जैसी पारंपरिक साड़ियों के निर्माण में किया जाता है। लोग रेशम के प्रकारों, उसके उत्पादन और वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया को करीब से जान-समझ रहे हैं। स्टॉल में टसर धागा विक्रय केंद्र भी है, जहां प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशेष सिल्क उत्पाद रखे गए हैं। इनमें सारंगढ़ से समलेश्वरी मलबरी सिल्क एवं समलेश्वरी टसर सिल्क, सरगुजा से महामाया सिल्क, जगदलपुर से दंतेश्वरी सिल्क, कांकेर से अरण्य सिल्क, महासमुंद से खल्लारी सिल्क, रायगढ़ से फॉरेस्ट गोल्ड सिल्क, गरियाबंद से गंडेश्वर सिल्क और जांजगीर-चांपा से प्रसिद्ध चांपा सिल्क के रेशम धागे और अन्य सामग्री शामिल हैं। टसर बीजागर और स्पिनिंग मशीन के जरिए धागाकरण की प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन भी किया जा रहा है। किसानों को ग्रामोद्योग विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। इसी क्रम में लोग निजी क्षेत्र में शहतूत की खेती और रेशम कीटपालन को बढ़ावा देने के लिए संचालित नवीन शहतूत रेशम बाड़ी योजना के बारे में जान रहे हैं। इसके तहत निजी भूमि पर एक एकड़ में शहतूत पौधरोपण एवं कीटपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना में पौधरोपण एवं संधारण, कीटपालन भवन एवं उपकरण व सिंचाई सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। साथ ही पौधरोपण के बाद किसानों को शहतूत की खेती और रेशम कीटपालन की तकनीकी जानकारी देने के लिए एक माह का निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। शहतूत रेशम कीटपालन कृषि आधारित कुटीर उद्योग है, जिसका अंतिम उत्पाद रेशम है। इसे खेती-किसानी के साथ आसानी से अपनाया जा सकता है। Share This Article Post navigation राज्योत्सव : खाना खजाना जोन में छत्तीसगढ़ी व्यंजन स्टॉल बना आकर्षण का केन्द्र…पताल (टमाटर) की चटनी के साथ मूंग बड़ा का स्वाद कृषि शिक्षा के लिए 30 एकड़ जमीन – 60 लाख रुपए दान…! भवानी साव रामलाल साव धर्मादा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विनय गुप्ता सम्मानित…, CM ने दिया कृषक रत्न सम्मान