Railway Modernization 2026Railway Modernization 2026
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बिलासपुर, 6 नवंबर 2026। Railway Modernization 2026 : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने रेल परिचालन को आधुनिक और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2026 में अप्रैल से नवंबर के बीच रेलवे के 13 रेलखंडों में कुल 110 रूट किलोमीटर पर स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली शुरू की गई है। यह कार्य 235 किलोमीटर दोहरी लाइन के बराबर है। नवंबर के पहले सप्ताह में बिलासपुर मंडल के सक्ती–झाराडीह–खरसिया और हर्री–वेंकटनगर–निगौरा रेलखंड भी इस आधुनिक व्यवस्था से जुड़ गए हैं। इससे व्यस्त रेलमार्गों पर अधिक ट्रेनों के परिचालन और समयपालन में सुधार की उम्मीद है।

दो प्रमुख रेलखंडों में शुरू हुई नई सिग्नलिंग व्यवस्था

बिलासपुर मंडल के हावड़ा–मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर सक्ती–झाराडीह–खरसिया खंड में 2 नवंबर 2026 को शाम 6:30 बजे स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली शुरू की गई। चार रेल लाइनों वाले इस खंड की लंबाई 16 रूट किलोमीटर है, जो 32 किलोमीटर दोहरी लाइन के बराबर है।

इस खंड में 32 नए स्वचालित सिग्नल लगाए गए हैं। पूरी व्यवस्था को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। ट्रेनों की स्थिति का पता लगाने के लिए मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) के 180 डिटेक्शन पॉइंट लगाए गए हैं। इसके अलावा डेटालॉगर, फायर अलार्म प्रणाली, अर्थ लीकेज डिटेक्टर और स्वचालित फ्यूज चेंजओवर व्यवस्था भी स्थापित की गई है।

वहीं, बिलासपुर–अनूपपुर रेलखंड के हर्री–वेंकटनगर–निगौरा सेक्शन में 5 नवंबर को स्वचालित सिग्नलिंग शुरू की गई। तीन रेल लाइनों वाले इस खंड की लंबाई 18 रूट किलोमीटर है, जो 36 किलोमीटर दोहरी लाइन के बराबर है। इस कार्य को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की परियोजना इकाई, बिलासपुर ने पूरा किया।

40 स्वचालित सिग्नल और आधुनिक निगरानी प्रणाली स्थापित

हर्री–वेंकटनगर–निगौरा खंड में कुल 40 स्वचालित सिग्नल लगाए गए हैं। इनमें अप लाइन, डाउन लाइन, अप ज्वाइंट लाइन और डाउन ज्वाइंट लाइन पर 10-10 सिग्नल शामिल हैं। तीनों स्टेशनों के यार्ड में 24 सेमी-ऑटोमैटिक सिग्नल भी लगाए गए हैं। इनमें हर्री में 12, वेंकटनगर में 10 और निगौरा में 2 सिग्नल शामिल हैं।

ट्रेनों की स्थिति की निगरानी के लिए MSDAC के 172 डिटेक्शन पॉइंट और 197 ट्रैक सेक्शन बनाए गए हैं। इसके अलावा एक ऑटो हट और 24 A मार्कर बोर्ड स्थापित किए गए हैं। सिग्नलिंग व्यवस्था की निगरानी और सुरक्षा के लिए डेटालॉगर, एकीकृत विद्युत आपूर्ति प्रणाली (IPS), अर्थ लीकेज डिटेक्टर, फायर अलार्म और फ्यूज चेंजओवर एवं अलार्म प्रणाली भी लगाई गई है।

क्या होती है स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली?

पारंपरिक सिग्नलिंग व्यवस्था में दो स्टेशनों के बीच पूरे रेलखंड में एक समय पर एक ही ट्रेन का परिचालन किया जाता है। अगली ट्रेन को तब तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक पहली ट्रेन अगले स्टेशन तक नहीं पहुंच जाती।

स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली में दो स्टेशनों के बीच रेलखंड को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया जाता है। प्रत्येक हिस्से में अलग सिग्नल लगाए जाते हैं, जो ट्रेनों की स्थिति के अनुसार अपने आप बदलते हैं। इससे एक ही रेलखंड पर एक के बाद एक कई ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन संभव हो पाता है।

इस व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली लगातार पटरी पर ट्रेनों की स्थिति की निगरानी करती है। आगे का निर्धारित मार्ग सुरक्षित और खाली होने पर ही ट्रेन को आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। इससे मानवीय निर्भरता कम करने और परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलती है।

यात्रियों को मिलेंगे ये फायदे

स्वचालित सिग्नलिंग शुरू होने से व्यस्त रेलमार्गों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी। ट्रेनों को स्टेशनों के बाहर और बीच रास्ते में अनावश्यक इंतजार कम करना पड़ सकता है, जिससे समयपालन में सुधार और यात्रा समय में बचत की संभावना है।

रेलवे के अनुसार, बढ़ी हुई क्षमता से भविष्य में नई ट्रेनों और अतिरिक्त फेरों के संचालन के लिए भी अधिक गुंजाइश बनेगी। इसके साथ ही कोयला, इस्पात, सीमेंट और बिजली उद्योगों से जुड़ी मालगाड़ियों की आवाजाही को गति मिलेगी।

ट्रेनों के बार-बार रुकने और चलने में कमी आने से ऊर्जा की बचत भी हो सकती है। आधुनिक निगरानी उपकरणों से सिग्नलिंग व्यवस्था के रखरखाव और परिचालन की विश्वसनीयता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वर्ष 2026 में 110 रूट किलोमीटर रेलमार्ग पर स्वचालित सिग्नलिंग शुरू कर अपनी आधुनिकीकरण योजना को आगे बढ़ाया है। रेलवे का कहना है कि यात्रियों और ग्राहकों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सिग्नलिंग सहित अन्य रेल अवसंरचना को आधुनिक बनाने का काम लगातार जारी है।


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