777X program
Wittman Regional Airport, Oshkosh, Wisconsin, USA - July 29, 2011: Boeing 787 taxing to runway for takeoff at the Air-Venture airshow.
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रायपुर / ETrendingIndia / Boeing 777X कार्यक्रम में नई देरी, 5 अरब डॉलर का नुकसान

अमेरिकी विमान निर्माता Boeing को अपने लंबे समय से विलंबित Boeing 777X कार्यक्रम में देरी के कारण लगभग 5 अरब डॉलर का बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने अब इसकी पहली डिलीवरी वर्ष 2027 तक टाल दी है। यह देरी Boeing की वित्तीय स्थिति और बाजार विश्वास दोनों पर असर डाल रही है।


बार-बार की देरी और बढ़ती लागत

Boeing 777X कार्यक्रम कंपनी की लंबी अवधि की वाइड-बॉडी विमान रणनीति का प्रमुख हिस्सा था। लेकिन लगातार प्रमाणन और उत्पादन में देरी के कारण अब तक कंपनी को लगभग 15 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।
इन विलंबों से प्रतिस्पर्धी कंपनी Airbus A350 को बाजार में मजबूत पकड़ बनाने का अवसर मिला है।


Boeing प्रबंधन की सफाई और ग्राहक असंतोष

हाल ही में Boeing के सीईओ केली ऑर्टबर्ग ने कहा कि कंपनी के सामने अभी “mountain of work” बाकी है। उन्होंने हालांकि यह भी बताया कि कोई नया तकनीकी मुद्दा सामने नहीं आया है।
इसके बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि Boeing 777X कार्यक्रम में देरी से ग्राहक अब धैर्य खो रहे हैं और मुआवजे की मांग कर सकते हैं।


गुणवत्ता और उत्पादन संबंधी चुनौतियाँ जारी

Boeing पिछले कई वर्षों से अपने प्रमुख मॉडल 737 MAX में आई गुणवत्ता समस्याओं और उत्पादन विलंबों से जूझ रहा है। हाल ही में कंपनी को अमेरिकी FAA (Federal Aviation Administration) से प्रति माह 42 जेट बनाने की मंजूरी मिली है, जो पहले 38 की सीमा पर रुकी थी।
इससे उम्मीद है कि Boeing अपने उत्पादन स्तर में सुधार कर सकेगा, लेकिन Boeing 777X कार्यक्रम में देरी से कंपनी की छवि पर असर जारी रहेगा।


वित्तीय आंकड़े और बाजार की प्रतिक्रिया

सितंबर में Boeing ने 55 जेट्स की डिलीवरी की, जो 2018 के बाद से सबसे मजबूत प्रदर्शन था। कंपनी का तिमाही राजस्व 30% बढ़कर 23.27 अरब डॉलर तक पहुंचा, हालांकि प्रति शेयर घाटा $7.47 दर्ज किया गया।
वॉल स्ट्रीट विश्लेषकों ने इस देरी और नुकसान को लेकर चिंता जताई है, फिर भी Boeing के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा मांग में वृद्धि एक उम्मीद की किरण बनी हुई है।


निष्कर्षतः:

Boeing 777X कार्यक्रम में देरी न केवल कंपनी के लिए आर्थिक झटका है, बल्कि इसके वैश्विक बाजार पर भी असर डाल रही है। बढ़ती मांग और प्रतिस्पर्धा के बीच अब Boeing को उत्पादन गति और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना होगा ताकि वह अपनी विश्वसनीयता दोबारा हासिल कर सके।