रायपुर / ETrendingIndia / मधु क्रांति और मधुमक्खी पालन मिशन , मधु क्रांति से ग्रामीण भारत में नई ऊर्जा
भारत में मधु क्रांति (Sweet Revolution) तेजी पकड़ रही है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं मधु मिशन (NBHM) के तहत वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और देश को वैश्विक शहद बाजार में अग्रणी बनाना है। इस मिशन से ग्रामीण परिवारों को बेहतर आय के साथ स्थायी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
परंपरागत से वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन की ओर बदलाव
पहले भारत में मधुमक्खी पालन अधिकतर असंगठित और पारंपरिक ढंग से किया जाता था। उत्पादन सीमित था और बाजार तक पहुंच भी कमजोर थी। लेकिन आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार ने इस क्षेत्र को संगठित समर्थन दिया। ₹500 करोड़ के बजट से शुरू हुआ यह मिशन अब किसानों को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़ रहा है।
संरचित प्रयासों से दिख रहे परिणाम
आज देशभर में विश्वस्तरीय हनी टेस्टिंग लैब्स, प्रोसेसिंग यूनिट्स और कोल्ड स्टोरेज सेंटर स्थापित किए गए हैं। लगभग 14,000 से अधिक मधुमक्खी पालक ‘मधुक्रांति पोर्टल’ पर पंजीकृत हैं, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित हो रही हैं। किसानों को प्रशिक्षण, एफपीओ गठन और सहकारी मॉडल से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए गए हैं।
उत्पादन और निर्यात दोनों में उछाल
भारत में 2024 में शहद उत्पादन 1.4 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। वहीं 2023–24 में भारत ने 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक शहद का निर्यात किया, जिसकी कीमत 177.5 मिलियन डॉलर रही। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा शहद निर्यातक बन गया है। गुणवत्ता जांच और सोर्स ट्रैसेबिलिटी से वैश्विक बाजार में भारतीय शहद की विश्वसनीयता बढ़ी है।
आत्मनिर्भर भारत के मार्ग पर सशक्त ग्रामीण भारत
सरकार अब एफपीओ विस्तार, डिजिटल पंजीकरण और मार्केट लिंकिंग पर ध्यान दे रही है। महिलाओं और युवाओं को भी इस मिशन में सक्रिय भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है। मधु क्रांति मिशन न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि परागण और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहा है।
