रायपुर / ETrendingIndia / : भारत में जापानी कार निवेश से बढ़ी ऑटो इंडस्ट्री की रफ्तार
टोयोटा, होंडा और सुजुकी जैसी जापानी कंपनियां अब भारत को अपना नया कार उत्पादन केंद्र बना रही हैं।
ये कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर देश में नई फैक्ट्रियां और मॉडल लॉन्च कर रही हैं। इस कदम से भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र तेज़ी से उभर रहा है।
इस परिवर्तन का एक बड़ा कारण जापान की चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति है।
चीन से दूरी और भारत की बढ़ती अहमियत
अब जापानी कंपनियां चीन की जगह भारत को प्राथमिकता दे रही हैं।
भारत की कम लागत, बेहतर मज़दूर शक्ति और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के कारण विदेशी निवेश बढ़ रहा है।
भारत में जापानी कार निवेश का यह रुझान न सिर्फ़ घरेलू बाजार को मजबूत करेगा, बल्कि निर्यात भी बढ़ाएगा।
इसी कारण, टोयोटा और सुजुकी ने मिलकर लगभग 11 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
मोदी सरकार की नीतियों से मिला बड़ा सहारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए लगातार नीतियां लागू कर रही है।
सरकार का उद्देश्य है कि भारत न सिर्फ घरेलू मांग पूरी करे बल्कि एक बड़ा एक्सपोर्ट हब भी बने।
चीनी निवेश पर सीमाओं के चलते जापानी कंपनियों को अब भारत में बड़ा अवसर दिख रहा है।
इस कारण, वे अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नए मॉडल भी लॉन्च करने की तैयारी में हैं।
होंडा और टोयोटा की नई रणनीति
होंडा ने भारत को अपनी नई इलेक्ट्रिक कार के उत्पादन और निर्यात का मुख्य केंद्र बनाने की घोषणा की है।
वहीं टोयोटा आने वाले वर्षों में 15 नए या अपडेटेड मॉडल लॉन्च करने जा रही है।
इसके साथ ही कंपनी ग्रामीण बाजार में अपनी पहुंच गहरी करेगी।
भारत में जापानी कार निवेश का यह रुझान आने वाले दशक में देश को एशिया का प्रमुख वाहन उत्पादन केंद्र बना सकता है।
निष्कर्ष – भारत बनेगा एशिया का नया ऑटो हब
कुल मिलाकर, जापानी कंपनियों का यह बड़ा निवेश भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करेगा।
चीन से दूर होकर वे अब भारत पर भरोसा जता रही हैं।
इससे रोजगार, निर्यात और तकनीकी विकास—तीनों में नई ऊर्जा आएगी।
भारत में जापानी कार निवेश आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।
