US Army
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रायपुर / ETrendingIndia / अमेरिकी सेना 10 लाख ड्रोन खरीदेगी , अमेरिकी सेना का ड्रोन अधिग्रहण मिशन शुरू

अमेरिकी सेना 10 लाख ड्रोन खरीदेगी , अमेरिकी सेना ने आने वाले दो से तीन वर्षों में 10 लाख ड्रोन खरीदने की योजना बनाई है।
अमेरिकी सेना सचिव डेनियल ड्रिस्कॉल ने बताया कि वर्तमान में सेना हर साल करीब 50,000 ड्रोन खरीदती है, लेकिन अब इस संख्या को कई गुना बढ़ाने की तैयारी है।
उन्होंने कहा, “यह बड़ा कदम है, लेकिन हम इसे करने में पूरी तरह सक्षम हैं।”


रूस-यूक्रेन युद्ध से मिली सीख

ड्रिस्कॉल ने बताया कि अमेरिका ने यह निर्णय रूस-यूक्रेन युद्ध से मिली सीखों के आधार पर लिया है, जहां छोटे और सस्ते ड्रोन युद्ध में महत्वपूर्ण हथियार बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन प्रत्येक वर्ष लगभग 40 लाख ड्रोन बनाते हैं, जबकि चीन इससे दोगुना उत्पादन करने में सक्षम है।
इस कारण अमेरिका अब अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करना चाहता है।


घरेलू ड्रोन उत्पादन को बढ़ावा

अमेरिकी सेना सचिव ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि अमेरिका स्वदेशी ड्रोन निर्माण क्षमता विकसित करे, जिसमें मोटर, सेंसर, बैटरी और सर्किट बोर्ड जैसी सामग्री भी घरेलू स्तर पर बने।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इनका अधिकांश उत्पादन चीन में होता है।
ड्रिस्कॉल ने कहा, “हम चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में हम किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत लाखों ड्रोन का उत्पादन कर सकें।”


भविष्य के युद्ध के लिए नई रणनीति

ड्रिस्कॉल ने स्पष्ट किया कि अब सेना ड्रोन को “महंगे उपकरण” नहीं बल्कि “खपत योग्य गोला-बारूद” के रूप में देखेगी।
उन्होंने कहा कि ड्रोन भविष्य के युद्धों का चेहरा बनेंगे, और इसलिए अमेरिका को इसमें निवेश बढ़ाना होगा।
रक्षा मंत्रालय पहले से ही Replicator Initiative के तहत 2025 तक हजारों स्वायत्त ड्रोन तैनात करने की दिशा में काम कर रहा है।


निजी क्षेत्र से साझेदारी और निवेश

ड्रिस्कॉल ने बताया कि सेना अब बड़े रक्षा ठेकेदारों के बजाय निजी ड्रोन कंपनियों के साथ साझेदारी करेगी, जो व्यावसायिक उपयोग के लिए ड्रोन बनाती हैं।
उन्होंने कहा, “हम ऐसे निर्माताओं के साथ काम करना चाहते हैं जो अमेज़न जैसी कंपनियों के लिए डिलीवरी ड्रोन बनाते हैं।”
उनका मानना है कि इससे उत्पादन तेज, लागत कम और नवाचार अधिक होगा।


ड्रोन युद्ध का भविष्य तय करेंगे

अंत में ड्रिस्कॉल ने कहा कि “ड्रोन भविष्य के युद्ध का मुख्य हथियार होंगे और हमें इनकी आक्रामक व रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में निवेश करना होगा।”
इस कदम के जरिए अमेरिका न केवल अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है, बल्कि ड्रोन तकनीक में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में भी बढ़ रहा है।