रायपुर, 02 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / The farmers’ fair promotes the cultivation of medicinal and aromatic plants./ औषधीय पौधों की खेती , औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के प्रति किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक फसलों की तुलना में कम लागत, अधिक मुनाफा और बाजार में बढ़ती मांग इसके प्रमुख कारण हैं। अश्वगंधा, लेमनग्रास, तुलसी और खस जैसी फसलों से किसान प्रति एकड़ अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, जिसमें सरकारी सब्सिडी और तकनीकी सहायता सहायक सिद्ध हो रही है।
छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ द्वारा कुम्हारी, दुर्ग में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने स्टॉल लगाकर शासकीय योजनाओं की जानकारी दी।
स्टॉल पर खस, लेमनग्रास और अन्य औषधीय पौधों की खेती के सफल मॉडल प्रदर्शित किए गए, जो किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।
मेले में औषधीय पौधों से बने उत्पादों का निःशुल्क वितरण भी किया गया। किसानों और आमजनों को नन्नारी शरबत और लेमनग्रास तेल के उपयोग व लाभों की जानकारी दी गई।
