रायपुर, 6 मार्च 2026/ ETrendingIndia / Small village, small initiatives and big dreams: Badhari Tati becomes ‘Lakhpati Didi’, gets economic freedom / बधरी ताती लखपति दीदी , छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला के छोटे से गांव पालनार की रहने वाली बधरी ताती की कहानी बताती है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिल जाए तो छोटे गांवों से भी बड़े सपने पूरे हो सकते हैं।
कभी सीमित संसाधनों में जीवन गुजारने वाली बधरी ताती आज आत्मनिर्भर बनकर आर्थिक आज़ादी की मिसाल बन गई हैं और गांव में “लखपति दीदी” के नाम से पहचानी जाती हैं।
छोटी पहल से शुरू हुआ बदलाव
पालनार गांव के चयनित होने के बाद प्रशासन ने यहां शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। इसी दौरान छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत 10 महिलाओं ने मिलकर “पूजा स्व सहायता समूह” बनाया, जिसमें बधरी ताती भी शामिल हुईं। यही कदम उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत बना।
छोटे ऋण से शुरू हुआ कारोबार
समूह से जुड़ने के बाद बधरी ताती को 1,500 रुपये की चक्रिय निधि, 3,000 रुपये का बैंक लिंकेज ऋण और बाद में 5,000 रुपये का मुद्रा ऋण मिला।
इस छोटी सी पूंजी से उन्होंने अपने घर पर किराना दुकान शुरू की और धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया।
कई स्रोतों से बढ़ी आय
आज बधरी ताती की आय कई स्रोतों से हो रही है। उन्हें सब्जी उत्पादन से लगभग 6,200 रुपये, बकरी और मुर्गी पालन से करीब 20,000 रुपये, वनोपज जैसे तेंदूपत्ता, महुआ और टोरा से लगभग 30,000 रुपये तथा किराना दुकान से करीब 16,000 रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
बधरी ताती कहती हैं कि पहले वे केवल घर के काम तक सीमित थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती मिली। आज वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बधरी ताती की कहानी संदेश देती है कि छोटी सी पहल, सीमित संसाधन और दृढ़ संकल्प के साथ छोटे गांवों से भी अपने सपने को साकार किया जा सकता है ।
