Share This Article रायपुर, 31 मई 2026/ ETrendingIndia / नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah ने भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार इस मुद्दे का समाधान संवाद, कूटनीति और आपसी बातचीत के माध्यम से निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। मार्च 2026 के चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पद संभालने के पश्चात संसद में अपने पहले संबोधन के दौरान बलेंद्र शाह ने स्पष्ट किया कि सीमा से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाएगा। बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संसद में कहा कि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद का समाधान “टेबल टॉक” और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और विशेषज्ञों की सहायता से समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी जटिल सीमा विवाद का स्थायी समाधान केवल बातचीत और आपसी सहमति से ही संभव है। लिपुलेख-लिम्पियाधुरा विवाद का भी किया उल्लेख संसद में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने नेपाल द्वारा दावा किए जाने वाले लिपुलेख-लिम्पियाधुरा क्षेत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ब्रिटिश भारत के दौर से जुड़ी हुई है और इस कारण नेपाल इस विषय पर ब्रिटेन के साथ भी चर्चा करने की योजना बना रहा है। नेपाल सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों के आधार पर विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। विशेषज्ञों की मदद से निकाला जाएगा समाधान प्रधानमंत्री ने बताया कि सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच इतिहासकारों, सर्वेक्षण विशेषज्ञों और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने पर सहमति बनी है। उनके अनुसार, तथ्यात्मक और ऐतिहासिक अध्ययन के आधार पर समाधान तलाशना दोनों देशों के हित में होगा। चीन और ब्रिटेन से भी हुई चर्चा बलेंद्र शाह ने यह भी कहा कि नेपाल सरकार ने इस विषय पर चीन और यूनाइटेड किंगडम के साथ भी कूटनीतिक स्तर पर चर्चा की है। उनका मानना है कि सीमा विवाद के ऐतिहासिक पहलुओं को समझने के लिए विभिन्न पक्षों से संवाद आवश्यक है। भारत-नेपाल संबंधों पर रहेगी नजर भारत और नेपाल के बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में Balendra Shah India Nepal Border Issue पर दिया गया यह बयान दोनों देशों के बीच भविष्य की कूटनीतिक वार्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाने से दोनों पड़ोसी देशों के संबंध और अधिक मजबूत हो सकते हैं तथा क्षेत्रीय स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा। Share This Article Post navigation मेस्सी कोलकाता दौरा विवाद: पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज सात साल बाद फिर शुरू होगा भारत-चीन सीमा व्यापार : लिपुलेख मार्ग से बढ़ेगी कारोबारी गतिविधियां