रायपुर, 8 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “Balochistan: Major Terror Attack, Fierce Firing on Police Post… 9 Policemen Dead, Including 2 SHOs” पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आतंकवादियों ने एक बार फिर बड़ा खूनखराबा किया है. बलूचिस्तान प्रांत के एक सुदूर इलाके में रात के अंधेरे में भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया. इस अचानक हुए हमले के बाद पुलिस और आतंकियों के बीच भयंकर मुठभेड़ शुरू हो गई. इस गोलीबारी में 9 पुलिस अधिकारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.
पिछले कुछ समय से इस इलाके में सुरक्षा बलों पर हमले बहुत तेजी से बढ़े हैं, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है.
यह पूरी घटना बलूचिस्तान के जिय़ारत जिले के एक बेहद पिछड़े और पहाड़ी इलाके में हुई है. स्थानीय पुलिस के मुताबिक, हमला बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया गया था ताकि जवानों को संभलने का मौका न मिले.
आतंकियों ने न सिर्फ अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, बल्कि वे वहां तैनात आठ पुलिस अधिकारियों को बंदूक की नोक पर अगवा करके अपने साथ ले गए. इस घटना के बाद सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया और तुरंत एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया गया.
बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने बताया कि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण अगवा किए गए सभी आठ पुलिसकर्मियों को बाद में सुरक्षित बचा लिया गया है.
इस बड़े आतंकी हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी उग्रवादी संगठन ने नहीं ली है. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे प्रतिबंधित संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए का हाथ हो सकता है.
यह संगठन पहले भी इस तरह के हमलों को अंजाम देता रहा है. हाल ही में तटीय शहर जीवानी में एक सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी बीएलए ने ली थी.
सरकार ने अभी तक उस दावे की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस इलाके में बढ़ते हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
बलूचिस्तान में सिर्फ सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी इन हमलों से परेशान हैं.
पिछले दिनों क्वेटा शहर के बाहरी इलाके में बंदूकधारियों ने आम लोगों पर भी हमला किया था. इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने क्वेटा के पास एक बड़ा धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है.
प्रदर्शनकारी सरकार से बेहतर सुरक्षा और भविष्य में होने वाले हमलों से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि वे अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और सरकार उन्हें सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है.
