रायपुर 30 दिसंबर 2025/ ETrendingIndia / भारत 2025 आर्थिक सुधार से नागरिक और व्यवसायी लाभान्वित
2025 में भारत के आर्थिक सुधार ने नागरिकों और व्यवसायों के लिए सरलता और स्थायित्व की दिशा में कदम बढ़ाया।
कर, श्रम, ग्रामीण रोजगार, MSME, GST और निर्यात नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
सुधारों का मुख्य उद्देश्य था – जीवन सरल बनाना, व्यवसाय आसान करना और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करना।
कर सुधार – आम नागरिकों की जेब में बढ़ी रकम
संघीय बजट 2025-26 में आयकर सुधारों से ₹12 लाख तक की वार्षिक आय कर-मुक्त हुई।
मानक कटौती सहित 12.75 लाख तक लाभ प्राप्त हुआ।
आयकर अधिनियम, 1961 को संशोधित कर नया Income Tax Act 2025 लाया गया।
इसमें अनुपयुक्त प्रावधान हटाए गए, भाषा सरल हुई और कर प्रणाली अधिक पारदर्शी बनी।
श्रम और रोजगार सुधार – संरचना सरल, सुरक्षा विस्तारित
29 श्रम कानूनों को चार कोड में समेकित किया गया।
समान वेतन, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा से लगभग 50 करोड़ श्रमिक लाभान्वित हुए।
महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व और सुरक्षा प्रावधान मजबूत किए गए।
ग्रामीण रोजगार के लिए Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission Act 2025 लागू हुई।
125 दिन वार्षिक रोजगार, समय पर वेतन और कृषि तथा सामुदायिक विकास के लिए नए अवसर सुनिश्चित किए गए।
MSME और GST 2.0 – व्यवसाय में सरलता और वृद्धि
MSME नियमों में लचीलापन और वित्त तक आसान पहुँच सुनिश्चित की गई।
क्रेडिट गारंटी और कार्यशील पूंजी सुधार के माध्यम से MSME समर्थित हुए।
GST 2.0 ने कर प्रणाली को सरल बनाया। 5% और 18% की दो-स्तरीय दर लागू कर विवाद और लागत कम की गई।
संगठित अनुपालन से 1.5 करोड़ करदाताओं का आधार मजबूत हुआ।
निर्यात और व्यापार सुधार – प्रतिस्पर्धा और स्केल बढ़ाया
Export Promotion Mission के तहत 2025–31 तक ₹25,060 करोड़ का निवेश।
सिंगल विंडो, Trade Connect, ICEGATE और e-commerce export hubs जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बनाए गए।
MSME और निर्यातकों को सरकारी खरीद और फाइनेन्स में आसान पहुँच मिली।
निष्कर्ष – सरल, पारदर्शी और दीर्घकालिक विकास
भारत 2025 आर्थिक सुधार ने जीवन और व्यवसाय दोनों में सुधार लाया।
कर प्रणाली सरल, रोजगार सुरक्षित, व्यापार और निर्यात मजबूत हुए।
इससे भारत का दीर्घकालिक आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में लाभ हुआ।
