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रायपुर, 17 अगस्त 2026 / ETrendingIndia / भारत की इलेक्ट्रिक कारों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यूरोप भारतीय इलेक्ट्रिक मोटर कारों का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बनकर उभरा, जबकि ब्रिटेन दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा।

ई-कार निर्यात में जबरदस्त उछाल

पहली तिमाही में भारत से इलेक्ट्रिक मोटर कारों का निर्यात 1,309 से बढ़कर 10,802 वाहन हो गया। यानी एक साल में निर्यात की संख्या कई गुना बढ़ी।

निर्यात आय में भी बड़ा इजाफा

इलेक्ट्रिक कारों से निर्यात आय 2.22 करोड़ डॉलर से बढ़कर 36.9 करोड़ डॉलर पहुंच गई। यह भारत के ईवी उद्योग की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विदेशी बाजारों में मजबूत होती मांग का संकेत है।

ब्रिटेन भी बना बड़ा बाजार

ब्रिटेन भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बाजार बन रहा है। इससे पहले भी भारत के ईवी निर्यात में ब्रिटेन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

ग्लोबल ईवी बाजार में बढ़ती पैठ

यूरोप में इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ रही है। 2026 की पहली तिमाही में यूरोपीय संघ में बैटरी इलेक्ट्रिक कारों की बाजार हिस्सेदारी 19.4% रही, जो एक साल पहले 15.2% थी।

‘मेड इन इंडिया’ इलेक्ट्रिक कार

भारत का ईवी उद्योग अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। यूरोप और ब्रिटेन में बढ़ता निर्यात भारतीय कंपनियों के लिए ‘मेड इन इंडिया’ इलेक्ट्रिक कारों को वैश्विक बाजार में स्थापित करने का बड़ा अवसर बन रहा है।


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