रायपुर 27 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / India-EU Free Trade Agreement concluded: A major strategic success in India’s global trade relations – Announcement by the Prime Minister and European Commission President Ms. Ursula von der Leyen./ भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता , प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूरोपीय नेताओं की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ सम्मेलन में आज संयुक्त रूप से भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (भारत-यूरोपीय संघ एफटीए) को संपन्न करने की घोषणा की।
यह घोषणा भारत-यूरोपीय संघ के आर्थिक संबंधों और प्रमुख वैश्विक भागीदारों के साथ व्यापार के संबंध में ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
यह मुक्त व्यापार समझौता 2022 में वार्ता को पुनः शुरू किये जाने के बाद से हुई गहन चर्चा के उपरांत संपन्न हुआ है।
यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं में भारत का द्विपक्षीय व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये (136.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर) था जिसमें 6.4 लाख करोड़ रुपये (75.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निर्यात और 5.1 लाख करोड़ रुपये (60.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आयात किया जा रहा था।
सेवा क्षेत्र में भारत-यूरोपीय संघ का व्यापार 2024 में 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया।
भारत और यूरोपीय संघ चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 25 प्रतिशत के बराबर हैं और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा हैं। इस प्रकार, दो बड़ी, विविध और एक-दूसरे की संपूरक अर्थव्यवस्थाओं के एक साथ जुड़ने से व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने इस सिलसिले में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की रणनीतिक दूरदर्शिता और दृढ़ नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा:
‘भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का संपन्न होना भारत के आर्थिक क्रियाकलापों और वैश्विक दृष्टिकोण के संबंध में निर्णायक उपलब्धि का प्रतीक है।
भारत ने 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय निर्यात के लिए यूरोपीय संघ के व्यापारिक मूल्य के अनुसार अभूतपूर्व बाजार पहुंच सुनिश्चित किया है जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बढ़ावा देता है।
यह रोजगार सृजन करने, नवाचार को बढ़ावा देने, सभी क्षेत्रों में अवसरों को खोलने और वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए इस मुक्त व्यापार समझौते का लाभ उठाने के लिए तैयार है।’
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को निर्णायक रूप से बढ़ावा देता है।
समझौते के लागू होने पर लगभग 33 बिलियन अमरीकी डालर के निर्यात पर टैरिफ को 10 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के अतिरिक्त यह श्रमिकों, कारीगरों, महिलाओं, युवाओं और एमएसएमई को सशक्त बनाता है जबकि भारतीय व्यवसायों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अधिक गहराई से एकीकृत करता है और वैश्विक व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी और आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में यथोचित और ओसावधानी से तैयार कोटा आधारित ऑटो उदारीकरण पैकेज न केवल यूरोपीय संघ के वाहन निर्माताओं को भारत में अपने मॉडल को उच्च मूल्य बैंड में पेश करने की अनुमति देगा बल्कि भविष्य में मेक इन इंडिया और भारत से निर्यात की संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा।
भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च तकनीक वाले उत्पादों और अधिक प्रतिस्पर्धा से लाभ होगा। यूरोपीय संघ के बाजार में पारस्परिक बाजार पहुंच भारत में निर्मित ऑटोमोबाइल के लिए यूरोपीय संघ के बाजार तक पहुंचने के अवसर भी खोलेगी।
भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के अंतर्गत परिवर्तनकारी रूप से बढ़ावा मिलेगा जिससे भारतीय किसानों और कृषि उद्यमों के लिए एक समान अवसर तैयार होगा।
चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल और सब्जियां, और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसी प्रमुख वस्तुओं से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, ग्रामीण आजीविका को मजबूत किया जा सकेगा, समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
भारत ने घरेलू प्राथमिकताओं के साथ निर्यात वृद्धि को संतुलित करते हुए डेयरी, अनाज, पोल्ट्री, सोयामील, कुछ फलों और सब्जियों सहित संवेदनशील क्षेत्रों की विवेकपूर्ण सुरक्षा की है।
सेवा क्षेत्र दोनों अर्थव्यवस्थाओं का प्रमुख और तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा है, इसके कारण भविष्य में इस क्षेत्र में अधिक व्यापार होगा। बाजार पहुंच की निश्चितता, गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार, डिजिटल रूप से वितरित सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करना, गतिशीलता में आसानी भारत से सेवा संबंधी निर्यात को बढ़ावा देगी।
यह एफटीए आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं, पेशेवर सेवाओं, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, पर्यटन, निर्माण और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों सहित भारत के प्रमुख और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यूरोपीय संघ से विस्तारित और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करता है।
यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों (जिसमें आईटी/आईटीईएस, व्यावसायिक सेवाएं, अन्य व्यावसायिक सेवाएं और शिक्षा सेवाएं शामिल हैं) तक भारत की अनुमानित पहुंच भारतीय सेवा प्रदाताओं को बढ़ावा देगी और उन्हें यूरोपीय संघ के उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी विश्व स्तरीय भारतीय सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाएगी जबकि भारत की ओर से प्रस्तुत किए गए 102 उप-क्षेत्रों तक यूरोपीय संघ की पहुंच यूरोपीय संघ से भारत में उच्च तकनीकी सेवाओं और निवेश लाएगी जिसके परिणामस्वरूप पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यवस्था होगी।
भारत ने पांच वर्ष में सामाजिक सुरक्षा समझौतों से रचनात्मक रूप से जुड़ने के लिए एक रूपरेखा भी सुनिश्चित की है जिसमें छात्रों के आवागमन और अध्ययन के बाद के कार्य के अवसरों में सहयोग के लिए उपयुक्त ढांचा भी शामिल है।
इसके अतिरिक्त, भारत ने यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को यूरोपीय संघ के उन सदस्य देशों में होम टाइटल के अंतर्गत काम करने की व्यवस्था हो जहां पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को विनियमित नहीं किया गया है।
ये प्रतिबद्धताएं न केवल रोजगार के अति महत्वपूर्ण अवसरों को खोलती हैं बल्कि प्रतिभा, नवाचार और सतत आर्थिक विकास के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को भी मजबूत करती हैं।
यह एफटीए कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, डिजाइन, गुप्त व्यापारिक जानकारियों, पौधों की किस्मों, आईपीआर के प्रवर्तन से संबंधित ट्रिप्स (टीआरआईपीएस) के अंतर्गत प्रदान की गई बौद्धिक संपदा सुरक्षा को मजबूत करता है, दोहा घोषणा की पुष्टि करता है और विशेष रूप से भारत द्वारा शुरू की गई पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) परियोजना जैसे डिजिटल पुस्तकालयों के महत्व को मान्यता देता है।
इस एफटीए से भारत की तकनीकी प्रगति को सहायता के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
इस एफटीए से व्यापार में काफी वृद्धि होने, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भारतीय व्यवसायों को यूरोपीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अधिक गहराई से जुड़ने की उम्मीद है।
भारत-यूरोपीय संघ एफटीए भारत और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय आर्थिक क्रियाकलापों, व्यापार को मजबूत करने और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में एक नया अध्याय है।
