रायपुर / ETrendingIndia / भारत का शाही संग्रहालय एकता का प्रतीक , एकता नगर में रखी गई नींव
गुजरात के एकता नगर में भारत के शाही संग्रहालय की नींव रखी गई है। यह आयोजन राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को देश की एकता और बलिदान की भावना से जोड़ेगा।
उन्होंने बताया कि यह पहल युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत से जोड़ने का एक माध्यम बनेगी।
भारत के एकीकरण की ऐतिहासिक कहानी
भारत की आज़ादी के बाद 550 से अधिक रियासतों का एकीकरण हुआ था। यह कार्य लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में संभव हुआ।
इस संग्रहालय का उद्देश्य उस ऐतिहासिक दौर को जीवंत करना है, जब अनेक रियासतों ने मिलकर एक भारत का निर्माण किया।
इस कारण, यह संग्रहालय देशवासियों को यह याद दिलाएगा कि किस प्रकार विश्वास और सहयोग से एकता की नींव रखी गई।
आधुनिक तकनीक और विरासत का संगम
करीब ₹367 करोड़ की लागत से बनने वाला यह संग्रहालय पाँच एकड़ क्षेत्र में तैयार होगा। इसमें राजवंशीय वस्त्र, दस्तावेज़, शिल्प, और ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
इसके साथ ही चार थीम आधारित गैलरी और डिजिटल अनुभव केंद्र होंगे।
इससे युवाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप इंटरएक्टिव ढंग से सीखने का अवसर मिलेगा।
एकता और लोकतंत्र की सीख
भारत का शाही संग्रहालय एकता का प्रतीक , संग्रहालय में 1947 से 1949 के बीच हुए राजनीतिक एकीकरण की झलक भी मिलेगी।
इससे आगंतुक जान सकेंगे कि कैसे रियासतों ने शांतिपूर्ण तरीके से भारत में विलय किया।
इस पहल का उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देना है।
संस्कृति, सौंदर्य और पर्यटन का संगम
संग्रहालय का डिज़ाइन आधुनिक और पारंपरिक दोनों शैलियों का मिश्रण होगा।
यहां जलस्रोत, राजसी उद्यान और कैफ़े भी होंगे, जहाँ आगंतुक शाही अनुभव का आनंद ले सकेंगे।
अंत में, यह संग्रहालय न केवल एक पर्यटन केंद्र होगा, बल्कि शोध, अध्ययन और सांस्कृतिक संरक्षण का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।
