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रायपुर / ETrendingIndia / भारत की MSP नीति कैसे बदल रही है कृषि परिदृश्य

भारत का कृषि क्षेत्र देश की लगभग आधी आबादी की आजीविका का आधार है।
लेकिन अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और बाज़ार में कीमतों की अस्थिरता किसानों के लिए लगातार चुनौती बनी रहती है।
इन परिस्थितियों में भारत की MSP नीति किसानों को स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करती है।


MSP नीति क्या है और कैसे काम करती है

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एक सरकारी नीति है, जो किसानों को उनकी फसलों के लिए पहले से तय न्यूनतम दाम की गारंटी देती है।
इससे किसानों को यह भरोसा रहता है कि बाजार भाव घटने पर भी उन्हें उचित मूल्य मिलेगा।
इस नीति के कारण किसान बेहतर बीज, उर्वरक और तकनीक में निवेश करने का साहस जुटा पाते हैं।

सरकार हर वर्ष 22 प्रमुख फसलों के लिए MSP घोषित करती है, जिनमें गेहूं, धान, दलहन, तिलहन और वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं।
कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) लागत, बाजार प्रवृत्ति और उत्पादन स्थिति को ध्यान में रखकर कीमत तय करता है।


किसानों की आय में बड़ा सुधार – 2025-26 सीजन के नए MSP

अक्टूबर 2025 में सरकार ने रबी विपणन सत्र 2026–27 के लिए नई MSP दरें मंज़ूर कीं।
गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो उत्पादन लागत पर 109% का लाभ देता है।
इसी तरह चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों के MSP में भी बढ़ोतरी हुई है।

इस कदम से लाखों किसानों की आय में सुधार होगा और रबी फसलों की खेती को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
पहले खरीफ सीजन में भी धान, तिलहन और दालों के MSP बढ़ाए गए थे।


MSP के तहत बढ़ी सरकारी खरीद और किसानों को सीधे भुगतान

पिछले एक दशक में MSP प्रणाली ने कृषि क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन किया है।
2014–15 से 2024–25 के बीच MSP पर खरीदे गए खाद्यान्न की मात्रा 761 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 1,175 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई।
वहीं, किसानों को किए गए भुगतान का कुल मूल्य ₹1.06 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.33 लाख करोड़ हो गया।

अब 1.84 करोड़ किसान सीधे MSP का लाभ उठा रहे हैं।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि MSP नीति किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत बना रही है।


PM-AASHA योजना और डिजिटल पारदर्शिता

सरकार ने MSP पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) शुरू किया है।
इसके तहत NAFED और NCCF जैसी एजेंसियां किसानों से सीधे खरीद करती हैं।
इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और किसानों को तुरंत भुगतान मिलता है।

साथ ही, e-Samriddhi और e-Samyukti जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों के रजिस्ट्रेशन, खरीद और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हैं।
कपास किसानों के लिए Kapas Kisan App भी शुरू किया गया है, जिससे वे रियल-टाइम में भुगतान और गुणवत्ता की जानकारी पा सकते हैं।


आत्मनिर्भरता की ओर कदम – दालों और तिलहन पर फोकस

सरकार का लक्ष्य 2027 तक दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।
इसके लिए PM-AASHA फंड को ₹45,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹60,000 करोड़ किया गया है।
अब 2028–29 तक तूर, उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दालों की 100% खरीद की जाएगी।

मार्च 2025 तक लगभग 2.46 लाख मीट्रिक टन तूर की खरीद की जा चुकी है, जिससे 1.7 लाख से अधिक किसानों को लाभ हुआ है।


MSP से कृषि में दीर्घकालिक परिवर्तन

पिछले 15 वर्षों में MSP आधारित खरीद में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
2009 से 2025 के बीच दालों की खरीद 7,000% तक बढ़ी, जबकि तिलहन में 15 गुना वृद्धि हुई है।
गेहूं और धान की खरीद भी तेजी से बढ़ी है, जिससे किसानों की आय में स्थिरता आई है।


निष्कर्ष – MSP नीति से सशक्त होता किसान

कुल मिलाकर, भारत की MSP नीति अब केवल मूल्य सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि कृषि विकास का इंजन बन चुकी है।
यह नीति किसानों को आर्थिक स्थिरता देती है, उन्हें नई फसलों की ओर प्रोत्साहित करती है, और सतत कृषि को बढ़ावा देती है।