Share This Article भोपाल, 24 सितंबर 2026। Bhopal Science Fair : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 13वें भोपाल विज्ञान मेले में आधुनिक विज्ञान, तकनीक, कृषि नवाचार और पारंपरिक हुनर का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। 22 से 26 सितंबर तक बरकतउल्ला विश्वविद्यालय मैदान में आयोजित इस मेले में ग्रामीण तकनीक, हस्तशिल्प, स्थानीय संसाधनों और आजीविका से जुड़े मॉडल भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने विज्ञान भारती और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के सहयोग से इस आयोजन का किया है। रोबोट से लेकर वैज्ञानिक मॉडल तक आकर्षण डिंडौरी के शिवम साहू द्वारा विकसित ‘हैक दि रोबो’ ह्यूमनॉइड रोबोट विद्यार्थियों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है। यह हिंदी और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में बातचीत करने में सक्षम है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित संवाद, कंप्यूटर विजन, चेहरा पहचानने और ऑब्जेक्ट पहचानने जैसी तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। रायसेन की संस्था ने केप्लर के गति नियमों पर आधारित मॉडल भी प्रदर्शित किए हैं, जिनसे विद्यार्थी ग्रहों की गति को प्रयोग के जरिए समझ रहे हैं। कृषि और डेयरी के लिए आधुनिक तकनीक मेले में कृषि और डेयरी क्षेत्र से जुड़े कई तकनीकी समाधान भी प्रदर्शित किए गए हैं। ‘डेयरीशील्ड प्रो’ कम लागत वाला सैनिटाइजेशन उपकरण है, जिसे डेयरी फार्मों में स्वच्छता और बेहतर वातावरण के उद्देश्य से विकसित किया गया है। सेंसर आधारित मृदा परीक्षण किट और माइक्रो-वेदर स्टेशन के जरिए किसानों को मृदा, मौसम, सिंचाई, उर्वरक और फसल प्रबंधन से जुड़े निर्णय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर लेने में मदद करने की पहल की जा रही है। मैकेनिकल वोटिंग मशीन और अनोखे आविष्कार राजगढ़ के पचोर निवासी 75 वर्षीय रामप्रसाद विश्वकर्मा द्वारा विकसित प्योर मैकेनिकल वोटिंग मशीन का मेले में लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। उनके अनुसार करीब 14 वर्षों के शोध और प्रयोग के बाद इसका प्रोटोटाइप तैयार हुआ। इसके अलावा स्वयं-सफाई वाली पानी की टंकी और लाख प्रसंस्करण के अपशिष्ट से तैयार जैविक मृदा सुधारक जैसे मॉडल भी प्रदर्शित किए गए हैं। कबाड़ से जुगाड़ और पारंपरिक शिल्प मेले में कबाड़, धातु, प्लास्टिक और ई-वेस्ट से तकनीकी उपकरण, वाहन, वाद्य यंत्र और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े मॉडल बनाने वाले देवेन्द्र प्रकाश तिवारी के काम को भी प्रदर्शित किया गया है। वहीं स्थानीय सामग्री से कम लागत वाली एसटीईएम और गणितीय शिक्षण सामग्री विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित शिक्षा का अवसर दे रही है। पारंपरिक शिल्प में सतपुड़ा की छीपा हाथ ठप्पा छपाई, मिट्टी की कलाकृतियां, बुधनी के लकड़ी के खिलौने और श्योपुर की पारंपरिक खराद कला भी मेले का हिस्सा हैं। स्थानीय संसाधनों से रोजगार और आजीविका पर जोर बुरहानपुर में केले के तने से रेशा निकालकर हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने की पहल, सिसल फाइबर निकालने की मशीन और जनजातीय क्षेत्रों के लिए कम लागत वाली जी-फिल्टर जल शोधन तकनीक भी प्रदर्शित की गई है। कृषि विज्ञान केन्द्र, रायसेन द्वारा किसानों के प्रशिक्षण, ऑन-फार्म परीक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जुड़े कार्यों की जानकारी दी जा रही है। विज्ञान मेले का उद्देश्य आधुनिक विज्ञान को आमजन के जीवन से जोड़ने के साथ स्थानीय प्रतिभाओं, पारंपरिक ज्ञान और नवाचारों को मंच उपलब्ध कराना है। Share This Article Post navigation MP News : CM मोहन यादव ने किया 35 लाख पेंशन हितग्राहियों को 212 करोड़ का भुगतान, सेवा संकल्प बाइक यात्रा का स्वागत