रायपुर 17 नवंबर 2025 / ETrendingIndia / Bihar elections show a new direction to the country: NDA’s victory reflects a unique balance between social harmony, integration of Hindutva and development model/ बिहार चुनाव NDA जीत विश्लेषण , बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की ऐतिहासिक जीत ने राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीति की नई दिशा को स्पष्ट कर दिया है।
इस सुनामी रूपी जनादेश में तीन प्रमुख तत्व—सामाजिक समरसता, हिन्दुत्व का संगठित आधार और विकास पर केंद्रित शासन मॉडल—निर्णायक साबित हुए।
यह चुनाव केवल गठबंधन की शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि मतदाताओं के बीच बदलते राजनीतिक व्यवहार का संकेत भी है।
पहला तत्व सामाजिक समरसता की रणनीति रही, जिसमें एनडीए ने जातीय समीकरणों को पार करते हुए व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार किया। भाजपा और जद (यू) दोनों ने अति पिछड़ा वर्ग, महादलित समुदाय, महिलाओं और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए पूर्व-संगठित योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों को मजबूत आधार बनाया। नतीजा यह रहा कि पारंपरिक जातीय M-Y ध्रुवीकरण कमज़ोर पड़ा और वोटरों का बड़ा वर्ग विकास को तरजीह देता दिखा।
दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष रहा हिन्दुत्व का समन्वित और अपेक्षाकृत संतुलित प्रस्तुतीकरण। भाजपा ने अपने कोर वोट को मजबूत बनाए रखते हुए, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों को अत्यधिक उग्रता के बजाय व्यापक सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रवाद के विमर्श से जोड़ा। इससे शहरी और युवा मतदाताओं में आकर्षण बढ़ा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी उसका प्रभाव मजबूत हुआ।
तीसरा और निर्णायक पहलू रहा विकास और सुशासन का एजेंडा। एनडीए ने सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, रोजगार एवं कल्याणकारी योजनाओं को अपने प्रचार का मुख्य आधार बनाया। विशेष तौर पर केंद्र और राज्य की संयुक्त योजनाओं — जैसे पीएम आवास, उज्ज्वला, मुफ्त राशन और छात्राओं के लिए योजनाओं — ने मतदाताओं के बीच भरोसा पैदा किया। इसने विपक्ष के प्रचार को काफी हद तक कमजोर किया।
बिहार चुनाव NDA जीत विश्लेषण , विश्लेषकों का मानना है कि इन तीन स्तंभों के संयोजन ने एनडीए को एक ऐसा व्यापक सामाजिक और वैचारिक गठजोड़ दिया, जिसने न केवल परंपरागत वोट बैंक को बचाए रखा बल्कि नए मतदाताओं को भी आकर्षित किया। इस तरह, बिहार का यह चुनाव परिणाम बदलते राजनीतिक सामाजिक समीकरणों का प्रतिबिंब भी है।
