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रायपुर / ETrendingIndia / बिल का मुख्य उद्देश्य

बिजली संशोधन बिल 2025 का उद्देश्य भारत के बिजली क्षेत्र को अधिक सक्षम और पारदर्शी बनाना है। इसलिए यह बिल लागत आधारित टैरिफ को बढ़ावा देता है, जिससे बिजली सस्ती और विश्वसनीय बन सके। इसके अलावा यह किसानों और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं को सब्सिडी जारी रखने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करता है।

इस बिल का मकसद बिजली क्षेत्र में सुधार लाना और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके साथ ही यह छुपी हुई क्रॉस-सब्सिडी को कम करता है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिल सके।


बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी

भारत के बिजली वितरण तंत्र में लंबे समय से कई चुनौतियाँ थीं। जैसे कि AT&C लॉस, बिलिंग की कमी, और एक ही डिस्कॉम पर निर्भरता। इसी कारण उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा नहीं मिल पाती थी। इसलिए संशोधन बिल 2025 इन समस्याओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इसके अलावा उद्योगों पर ज्यादा टैरिफ का बोझ पड़ता था। जिससे उत्पादन महंगा होता था और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती थी। इसलिए यह बिल क्रॉस-सब्सिडी को कम करने और बाजार आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।


साझा नेटवर्क और नई व्यवस्था

भारत का इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) पहले से साझा ढांचे पर काम करता है। इसी मॉडल को अब वितरण प्रणाली में भी लागू किया जाएगा। इससे लागत कम होगी और नेटवर्क डुप्लीकेशन घटेगा। अतः वितरण कंपनियाँ एक ही ढांचे से बेहतर सेवाएं दे सकेंगी।

इसके अलावा बिल यह सुनिश्चित करता है कि सभी कंपनियां उपभोक्ताओं को समान और गैर-भेदभावपूर्ण सेवा दें। जबकि बड़े ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं को कुछ मामलों में छूट मिल सकती है।


टैरिफ, सब्सिडी और जिम्मेदारी

बिल में लागत-आधारित टैरिफ को बढ़ावा दिया गया है। इससे अनावश्यक खर्च कम होंगे और सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी। साथ ही किसानों और गरीब परिवारों को सब्सिडी सीधे बजटीय सहायता से मिलेगी। इस कारण सब्सिडी पारदर्शी और समय पर मिल सकेगी।

इसके अलावा ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) को भी मान्यता दी गई है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नियामक संस्थाओं को अधिक अधिकार दिए गए हैं ताकि वे मानकों को लागू कर सकें और आवश्यक होने पर दंड भी लगा सकें।


निष्कर्ष

अंत में, बिजली संशोधन बिल 2025 भारत के ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने का प्रयास है। इसलिए यह बिल प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और बेहतर सेवाओं को बढ़ावा देता है। कुल मिलाकर, यह कदम भारत के “विकसित भारत 2047” लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान करता है।