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रायपुर, 14 सितंबर। ETrendingIndia / ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन उद्योग जगत और विशेषज्ञों ने कहा कि टैरिफ की मौजूदा चुनौतियों के बीच ब्रिक्स देशों की एकजुटता वैश्विक व्यापार और निवेश को नई गति दे सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रिक्स अब केवल राजनीतिक-आर्थिक मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की सामूहिक आर्थिक ताकत और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का अहम केंद्र बन रहा है।

टैरिफ चुनौती का मिलकर सामना

एसडब्ल्यूएफआई के चेयरमैन लक्ष्मी नारायणन ने कहा कि मौजूदा टैरिफ चुनौतियां ब्रिक्स देशों ने पैदा नहीं की हैं। ऐसे में सदस्य देश सहयोग के जरिए व्यापारिक दबावों का सामना करने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।

भारत-रूस व्यापार का लक्ष्य 100 अरब डॉलर

नारायणन के अनुसार, सम्मेलन के प्रमुख परिणामों में द्विपक्षीय व बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना, भारत-चीन सीमा मुद्दे के समाधान की दिशा में सकारात्मक सहमति और भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य शामिल है।

आईब्रिक्स से निवेश और परियोजनाओं को बढ़ावा

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स नीति और सहयोग का मंच है, जबकि आईब्रिक्स निवेश, पूंजी, सौदों और परियोजनाओं को जमीन पर उतारने का माध्यम बनेगा। इसमें निवेशकों, संप्रभु निधियों और परियोजना एजेंसियों को जोड़ने पर जोर रहेगा।

बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर

रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने दिल्ली घोषणा पत्र को वैश्विक सुरक्षा और सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक विकास जैसी चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

ब्रिक्स का उद्देश्य ऐसी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करना है, जहां वैश्विक फैसलों में अधिक देशों की भूमिका हो।

डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी संभावनाएं

पूर्व सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी ने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के सहयोग का प्रभावशाली उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे और नवाचार में सदस्य देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं।

भारत की वैश्विक भूमिका और मजबूत

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन के सफल आयोजन को भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का संकेत बताया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, विश्व नेताओं की भारत में मौजूदगी और उनके बीच हुई बातचीत से व्यापार, निवेश और वैश्विक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।


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