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रायपुर, 19 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / An initiative to provide relief and security to tendu leaf collectors: Charanpaduka scheme relaunched, after women heads, now available to men too / चरणपादुका योजना 2026 , छत्तीसगढ़ सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों और वनवासियों के हित में लगातार काम कर रही है। सरकार की विभिन्न योजनाओं से तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने चरणपादुका योजना को फिर से शुरू किया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग ने इस योजना को तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू किया है।

वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखियाओं को उच्च गुणवत्ता की चप्पलें (चरण पादुका) वितरित की गईं। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये खर्च किए।

वर्ष 2026 में इस योजना का विस्तार करते हुए पुरुष संग्राहकों को भी चरणपादुका देने का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

तेंदूपत्ता तोड़ने वाले लोग अक्सर जंगलों में कांटों, पत्थरों, कीड़ों, सांप-बिच्छुओं और गर्म जमीन पर नंगे पांव चलते हैं। ऐसे में मजबूत और सुरक्षित चप्पल उनके पैरों को चोट, संक्रमण और दुर्घटनाओं से बचाती है। चरणपादुका उनके लिए सिर्फ चप्पल नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और सुविधा का साधन है।

जेम पोर्टल से खरीदी गई इन चप्पलों में एक वर्ष की वारंटी भी दी गई है। इस योजना से वनांचल क्षेत्रों में खुशी का माहौल है और तेंदूपत्ता संग्राहकों का जीवन पहले से अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बन रहा है।

तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाली राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे संग्राहकों को दिया जाता है। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, दुर्घटना बीमा, विकलांगता सहायता और वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। राज्य में तेंदूपत्ता का पारिश्रमिक 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा तय किया गया है और राजमोहिनी देवी योजना के तहत अतिरिक्त लाभ भी दिए जा रहे हैं।