रायपुर, 18 फरवरी 2026 / ETrendingIndia / Water conservation changed the picture of Chidaula village / चिड़ौला जल संरक्षण सफलता , ग्रामीण विकास में जल का महत्व सबसे अधिक है। जल संरक्षण से खेती मजबूत होती है और किसानों की आय बढ़ती है। मनेंद्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर जिले की ग्राम पंचायत चिड़ौला में इसका प्रेरक उदाहरण देखने को मिला है।
शक्तिगत कूप से मिला स्थायी जल स्रोत
गांव में जयबहादुर सिंह के खेत में 1.80 लाख रुपये की लागत से शक्तिगत कूप बनाया गया। शासन की इस पहल का उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
वर्षा पर निर्भरता से मुक्ति
पहले किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर थे। सिंचाई की कमी से उत्पादन प्रभावित होता था। कूप बनने के बाद खेतों तक नियमित पानी पहुंचने लगा है, जिससे समय पर सिंचाई संभव हो रही है।
खेती में बढ़ोतरी और आत्मनिर्भरता
जल उपलब्धता से फसल उत्पादन बढ़ा है, दोहरी फसल की संभावना बनी है और किसानों की आय में सुधार हुआ है। यह कूप गांव में जल संरक्षण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है.
