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छोटे बच्चों का ज्यादा समय मोबाइल, टैबलेट और खासकर रील्स-शॉर्ट्स देखने में बिताना उनके भाषा विकास और एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक 2 से 5 साल के बच्चों के लंबे स्क्रीन टाइम के साथ आमने-सामने बातचीत, खेल और किताब पढ़ने जैसी जरूरी गतिविधियां कम हो रही हैं, जिससे बोलने में देरी के मामले सामने आ रहे हैं।

6-7 घंटे मोबाइल देखने वाला बच्चा

एक सरकारी अस्पताल में ढाई साल के बच्चे को बोलने में देरी की शिकायत के साथ लाया गया। वह केवल कुछ शब्द बोल पाता था। जांच में सुनने, देखने और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कोई समस्या नहीं मिली।

बाद में पता चला कि बच्चा रोजाना 6-7 घंटे मोबाइल पर कार्टून और छोटे वीडियो देखता था और खाना भी मोबाइल देखते हुए खाता था।

बातचीत और खेल बेहद जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती उम्र में माता-पिता से बातचीत, कहानी सुनना, किताबें पढ़ना और इंटरैक्टिव खेल भाषा सीखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ज्यादा स्क्रीन टाइम इन गतिविधियों का समय कम कर देता है।

रील्स क्यों बन सकती हैं परेशानी ?

रील्स और शॉर्ट्स में हर कुछ सेकेंड में नया कंटेंट मिलता है। इससे बच्चे लगातार तेज उत्तेजना के आदी हो सकते हैं और किताब पढ़ने, पढ़ाई या संगीत जैसी धीरे-धीरे परिणाम देने वाली गतिविधियां उन्हें कम आकर्षक लग सकती हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों ने साफ किया कि एकाग्रता की कमी के लिए केवल रील्स को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

माता-पिता अपनाएं ये आदतें

भोजन के समय स्क्रीन पूरी तरह बंद रखें।

शयनकक्ष को स्क्रीन-फ्री रखें।

सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करें।

बच्चों के साथ रोजाना कम से कम एक घंटे इंटरैक्टिव खेलें।

चित्रों वाली किताबें पढ़ें और कहानी सुनाएं।

बच्चे से रोजमर्रा के कामों के दौरान लगातार बातचीत करें।

रोजाना कम से कम एक घंटे शारीरिक गतिविधि या आउटडोर खेल के लिए प्रोत्साहित करें।

मोबाइल छीनना ही समाधान नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से मोबाइल छीनने के बजाय स्वस्थ डिजिटल आदतें विकसित करना जरूरी है। माता-पिता खुद भी संतुलित स्क्रीन उपयोग का उदाहरण बनें, क्योंकि बच्चे अपने आसपास के लोगों से बहुत कुछ सीखते हैं।


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