Share This Article नई दिल्ली, 06 सितंबर। Dedicated Freight Corridor : भारत की माल परिवहन व्यवस्था में Dedicated Freight Corridor (DFC) बड़ा बदलाव ला रहा है। देश में मालगाड़ियों के लिए विकसित किए गए 2,843 किलोमीटर लंबे हाई-कैपेसिटी रेल नेटवर्क से माल की तेज, विश्वसनीय और समयबद्ध आवाजाही को बढ़ावा मिल रहा है। खास बात यह है कि माल और यात्री ट्रेनों के लिए अलग-अलग मार्ग उपलब्ध होने से पारंपरिक रेल नेटवर्क पर दबाव भी कम हो रहा है। 2,843 KM का हाई-कैपेसिटी रेल नेटवर्क, दो बड़े कॉरिडोर से जुड़ा देश वर्तमान में DFC नेटवर्क में 1,337 किलोमीटर लंबा Eastern Dedicated Freight Corridor और 1,506 किलोमीटर लंबा Western Dedicated Freight Corridor शामिल है। ईस्टर्न कॉरिडोर पंजाब के न्यू सहनेवाल से बिहार के न्यू सोननगर तक फैला है, जबकि वेस्टर्न कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक पहुंचता है। 31 मार्च 2026 को करीब 102 किलोमीटर लंबे वैतरणा-जेएनपीटी सेक्शन के पूरा होने के साथ पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा पूरी तरह परिचालन में आ गया। इसके बाद डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों समेत मालगाड़ियों की जेएनपीटी तक निर्बाध आवाजाही संभव हुई है। रोज औसतन 435 मालगाड़ियां, अब तक 5.21 लाख से ज्यादा फेरे DFC नेटवर्क पर माल परिवहन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 31 अगस्त 2026 तक करीब 5.21 लाख मालगाड़ी फेरे संचालित किए जा चुके हैं। नेटवर्क पर प्रतिदिन औसतन करीब 435 मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। इस अवधि में करीब 658 अरब ग्रॉस टन किलोमीटर (GTK) और लगभग 360 अरब नेट टन किलोमीटर (NTK) का माल परिवहन दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में DFC नेटवर्क पर माल यातायात में पिछले वर्ष की तुलना में 13.74 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। डबल-स्टैक ट्रेन से ज्यादा माल, उद्योग और व्यापार को सीधा फायदा समर्पित माल ढुलाई मार्ग मिलने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों से अलग परिचालन पथ मिलता है। इससे ट्रेन संचालन में बेहतर समयबद्धता और अधिक लचीलापन आता है। वहीं, अधिक भार वहन क्षमता और डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन की सुविधा से एक ही ट्रेन में ज्यादा माल ले जाना संभव होता है। इसका सीधा फायदा निर्माताओं, व्यापारियों, आयातकों और निर्यातकों को मिल रहा है। तेज परिवहन और बेहतर समयबद्ध आपूर्ति से सप्लाई चेन की योजना बनाना आसान होता है, जबकि परिवहन लागत को कम करने में भी मदद मिलती है। गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल से मजबूत होगी मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स DFC नेटवर्क के साथ गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल भी विकसित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य केवल माल की लोडिंग और अनलोडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें एकीकृत लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करना है। रेल, सड़क और बंदरगाह समेत अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बेहतर तालमेल से माल को प्रथम छोर से अंतिम छोर तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे लॉजिस्टिक्स, भंडारण और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार तथा निजी निवेश के नए अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। यात्री ट्रेनों से लेकर पर्यावरण तक, DFC के कई फायदे माल और यात्री ट्रेनों के अलग-अलग परिचालन से पारंपरिक रेल मार्गों पर भीड़भाड़ कम होती है। इससे यात्री ट्रेनों की गति और समयपालन में सुधार के साथ भविष्य में अतिरिक्त यात्री सेवाओं के लिए भी क्षमता उपलब्ध हो सकती है। वहीं, बड़ी मात्रा में माल को सड़क परिवहन से रेल की ओर स्थानांतरित करने से राजमार्गों पर भारी वाहनों का दबाव और ट्रैफिक कम करने में मदद मिलती है। विद्युतीकृत DFC के कारण डीजल खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी सहायता मिलती है। कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पाद जैसी जरूरी वस्तुओं की तेज और विश्वसनीय आवाजाही से देश की सप्लाई व्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इस लिहाज से DFC केवल मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक नहीं, बल्कि भारत की तेज, आधुनिक और एकीकृत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था की अहम आधारशिला बन रहा है। Share This Article Post navigation ECLGS 5.0 : MSME और एयरलाइंस को ₹2.55 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी, जानें किसे मिलेगा फायदा AI-डेटा से डिफेंस तक MP में निवेश के बंपर मौके, 25 से ज्यादा नई नीतियों से बदला कारोबारी माहौल