रायपुर, 09 मार्च 2026/ ETrendingIndia / commendable initiative: On the 50th anniversary of the wedding, the Devangan couple announced to donate their bodies / देवांगन दंपति देहदान घोषणा , सनातन संस्कृति में दान को सर्वोच्च कार्य माना गया है, जो न केवल मन को शुद्धि प्रदान करती है बल्की नि:स्वार्थ भाव से दुसरों की मदद की भावना जगाती है। दान वास्तु का त्याग नहीं बल्कि करुणा और आत्मा का विस्तार है।
ऐसी भावना से अभिभूत होकर मैत्री विहार भिलाई के समाज सेवी पुरानिक राम देवांगन और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती देवयानी देवांगन ने 8 मार्च 2026 को अपने दाम्पत्य जीवन की स्वर्ण जयंती (50 वी) वर्षगाँठ मनाया। इस अवसर पर दोनों ने शरीर दान करने की घोषणा की है।
पुरानिक राम देवांगन ने चर्चा में कहा कि मृत्यु के बाद हम अपने शरीर को राख और मिट्टी के रूप में व्यर्थ कर देते हैं, इसके बजाय हमें इसे समाज सेवा में समर्पित करना चाहिए ताकी देहदान से मृत्यु के बाद इसे प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए चिकित्सा विभाग को सौंपने से, भावी नए डॉक्टरों को सहायक होकर मानवता के लिए हमारा देह कल्याणकारी हो।
देवांगन दंपति का कहना है कि हमारा शरीर ईश्वर का एक अनूठा उपहार है, और हम सौभाग्यशाली हैं कि यह लोक कल्याण के उपयोग आ सकती है।
इस अवसर पर विशेष अतिथि अरुण वोरा, पूर्व विधायक दुर्ग ने कहा कि जैसे वृक्ष अपना सर्वस्व दान दे देता है उसी तरह आज पुरानिक देवांगन और श्रीमती देवयानी देवांगन ने देहदान की घोषणा कर मानवता की दिशा में दधीचि के समान आदर्श प्रस्तुत किया है
