रायपुर, 21 दिसंबर 2025/ ETrendingIndia / Priority should be given to electric vehicles, not hybrid: Parliamentary committee / इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता , संसद की एक स्थायी समिति ने केंद्र सरकार से कहा है कि वाहन क्षेत्र में प्रोत्साहन योजनाओं का फोकस हाइब्रिड कारों की बजाय पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर होना चाहिए।
समिति के अनुसार हाइब्रिड वाहन अभी भी पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं माना जा सकता।
राज्यसभा में 12 दिसंबर को पेश रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट किया कि ईवी ही ऐसे वाहन हैं जिनसे शून्य टेलपाइप उत्सर्जन होता है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन से निपटने और शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए नीतिगत और वित्तीय समर्थन ईवी को ही मिलना चाहिए।
इस मुद्दे पर वाहन उद्योग में मतभेद सामने आए हैं। एक ओर टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड तकनीक को व्यवहारिक समाधान बताते हुए इसके लिए प्रोत्साहन की मांग कर रही हैं।
दूसरी ओर टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी घरेलू कंपनियां सिर्फ ईवी को बढ़ावा देने की पैरवी कर रही हैं। अन्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार पहले ही फेम (FAME) जैसी योजनाओं के जरिए ईवी को समर्थन दे रही है, जबकि हाइब्रिड को सीमित कर लाभ दिया गया है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता , समिति ने एथेनॉल मिश्रण को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि पुराने वाहनों में अधिक एथेनॉल मिश्रण से तकनीकी दिक्कतें, यांत्रिक नुकसान और उत्सर्जन बढ़ने का खतरा है।
समिति ने स्पष्ट किया कि वैकल्पिक ईंधन के तौर पर एथेनॉल उपयोगी हो सकता है, लेकिन इससे शून्य-उत्सर्जन वाहन बेड़े की ओर बढ़ने के लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकना चाहिए।
कुल मिलाकर, समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि भविष्य की परिवहन नीति में ईवी को केंद्र में रखकर ही प्रोत्साहन और निवेश की दिशा तय की जाए।
