रायपुर / ETrendingIndia / अप्रत्याशित निर्णय से बढ़ा फ्रांस का राजनीतिक संकट
फ्रांस के पीएम सेबेस्टियन लेकोर्नू का इस्तीफा , फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू का इस्तीफा सोमवार को उस समय आया जब उन्होंने कुछ घंटे पहले ही अपने नए मंत्रिमंडल की घोषणा की थी। यह निर्णय न केवल अप्रत्याशित था बल्कि फ्रांस की पहले से चल रही राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा गया। इस खबर के बाद यूरो और शेयर बाजार में गिरावट देखी गई।
सहयोगियों और विरोधियों दोनों की असहमति
लेकोर्नू ने कई हफ्तों तक विभिन्न राजनीतिक दलों से परामर्श के बाद रविवार को अपने मंत्रियों की घोषणा की थी। हालांकि, इसके बाद सहयोगियों और विरोधियों दोनों ने कैबिनेट के स्वरूप पर नाराजगी जताई। किसी को यह बहुत दक्षिणपंथी लगा, तो किसी ने इसे अपर्याप्त बताया। परिणामस्वरूप, सरकार की स्थिरता पर सवाल उठने लगे।
राष्ट्रपति मैक्रों को सौंपी इस्तीफा पत्र
सोमवार सुबह लेकोर्नू ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंप दिया। एलीसी पैलेस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस कारण से, नई सरकार का पहला कैबिनेट मीटिंग होने से पहले ही टल गया।
दो साल में पांचवें प्रधानमंत्री का इस्तीफा
ध्यान देने योग्य है कि लेकोर्नू केवल एक महीने पहले ही प्रधानमंत्री नियुक्त हुए थे। वे पिछले दो वर्षों में राष्ट्रपति मैक्रों के पांचवें प्रधानमंत्री थे। 2022 में पुनः निर्वाचित होने के बाद से मैक्रों को संसद में बहुमत न मिलने के कारण बार-बार राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल बुलाए गए समय से पहले के चुनावों ने संसद को और अधिक खंडित कर दिया।
निष्कर्षतः
इस प्रकार, फ्रांस के पीएम सेबेस्टियन लेकोर्नू का इस्तीफा न केवल सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाता है बल्कि देश में जारी सत्ता संघर्ष को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय फ्रांस की राजनीतिक दिशा को और अनिश्चित बना सकता है।
