Share This Article रायपुर, 07 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / वर्ष 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन के वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्ज़न को दिया गया है। उन्हें IceCube न्यूट्रिनो वेधशाला में निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए सम्मानित किया गया है.उनकी खोज ने ब्रह्मांड को देखने का विज्ञान को एक नया तरीका दिया है। दक्षिणी ध्रुव की बर्फ बनी विशाल प्रयोगशाला हैल्ज़न ने दक्षिणी ध्रुव की करीब एक घन किलोमीटर बर्फ को विशाल न्यूट्रिनो डिटेक्टर में बदलने की परिकल्पना को साकार करने में प्रमुख भूमिका निभाई। बर्फ के भीतर हजारों प्रकाश सेंसर लगाए गए हैं, जो न्यूट्रिनो के अत्यंत दुर्लभ टकराव से पैदा होने वाली रोशनी को दर्ज करते हैं। ‘घोस्ट पार्टिकल’ से खुल रहे अंतरिक्ष के रहस्य न्यूट्रिनो बेहद सूक्ष्म और विद्युत रूप से उदासीन कण हैं। ये पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं और पृथ्वी व हमारे शरीर से भी लगभग बिना किसी बाधा के गुजर सकते हैं। इसी कारण इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल है। ब्रह्मांड को समझने का नया रास्ता IceCube ने दूर अंतरिक्ष से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो का पता लगाकर न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान को नई दिशा दी है। इन कणों के जरिए वैज्ञानिक सुपरनोवा, ब्लैक होल और अन्य अत्यधिक ऊर्जावान ब्रह्मांडीय घटनाओं के स्रोतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। नोबेल समिति ने हैल्ज़न के वैज्ञानिक नेतृत्व को खगोल विज्ञान के एक नए युग की शुरुआत बताया है। Share This Article Post navigation फ्लाईदुबई विमान के सह-पायलट ने कबूला गुनाह, कहा- गाजा का बदला लेने के लिए रची थी साजिश अफ्रीका में भारत की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ी…जयशंकर घाना पहुंचे