रायपुर 3 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / The death of humanity and a compassionate society, not just a person: People fled with their mobile phones, leaving a struggling, injured man to die/ घायल व्यक्ति मदद नहीं , दिल्ली के विकास नगर इलाके से सामने आई एक घटना ने समाज की संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सड़क पर घायल अवस्था में एक व्यक्ति दर्द से तड़पता रहा, लेकिन आसपास मौजूद लोग मदद करने के बजाय उसकी असहाय स्थिति का फायदा उठाते नजर आए। स्कूटर पर सवार कुछ युवक न तो उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करते दिखे और न ही पुलिस या एम्बुलेंस को सूचना दी, बल्कि कथित तौर पर उसका मोबाइल फोन छीनकर वहां से फरार हो गए।
घायल व्यक्ति कई घंटों तक सड़क किनारे पड़ा रहा। इस दौरान न किसी ने उसे पानी दिया और न ही प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था की गई। भीड़ और आवाजाही के बावजूद इंसानियत कहीं नजर नहीं आई। समय पर मदद न मिलने के कारण आखिरकार उस व्यक्ति की बेहद दुखदायी एवं मार्मिक मौत हो गई।
यह घटना केवल एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक उदासीनता का आईना है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि डर, कानून की जानकारी की कमी और असंवेदनशीलता के कारण लोग दुर्घटनाग्रस्त या घायल व्यक्ति की मदद से कतराते हैं। हालांकि ‘गुड सेमेरिटन कानून’ ऐसे मददगारों को कानूनी सुरक्षा देता है, फिर भी जागरूकता की भारी कमी है।
यह हादसा हमें याद दिलाता है कि कानून से पहले मानवता आती है। समय पर की गई एक छोटी-सी मदद किसी की जान बचा सकती है। समाज को आत्ममंथन करने और जरूरतमंद की मदद के लिए आगे आने की सख्त जरूरत है। मध्य प्रदेश शासन ने इस संबंध में एक सराहनीय पहल की है.
