Share This Article रायपुर, 17 अक्टूबर 2026। Gondia-Jabalpur Railway Project : महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है। करीब 231 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹5,235.79 करोड़ है। परियोजना के तहत रेलखंड की क्षमता बढ़ाने, यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन को बेहतर बनाने तथा उत्तर और दक्षिण भारत के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने की योजना है। परियोजना के सर्वेक्षण और कई तकनीकी योजनाओं पर काम पूरा होने की जानकारी सामने आई है। तीन खंडों में पूरी होगी परियोजना गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को तीन प्रमुख खंडों में बांटा गया है। इसमें गोंदिया-बालाघाट का लगभग 42 किलोमीटर, बालाघाट-नैनपुर का 82.40 किलोमीटर और नैनपुर-जबलपुर का 106.80 किलोमीटर रेलखंड शामिल है। इस परियोजना का लगभग 213 किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश और करीब 18 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में स्थित है। इससे दोनों राज्यों के कई क्षेत्रों में रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। सर्वेक्षण पूरा, 507 पुलों की योजना परियोजना से संबंधित जानकारी के अनुसार, पूरे रेलखंड का सर्वेक्षण पूरा किया गया है। इस दौरान कुल 507 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है और अधिकांश पुलों की सामान्य रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। 23 में से 21 स्टेशन यार्ड की योजनाएं भी तैयार होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 10 नए स्टेशन भवनों के निर्माण और 31 स्थानों पर बिजली, पानी सहित अन्य उपयोगी सुविधाओं की व्यवस्था प्रस्तावित है। भूमि अधिग्रहण और वन संबंधी मंजूरियों की प्रक्रिया भी परियोजना के महत्वपूर्ण चरणों में शामिल है। यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही होगी बेहतर रेल लाइन दोहरीकरण का प्रमुख उद्देश्य मौजूदा रेलखंड की क्षमता बढ़ाना है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से यात्री और मालगाड़ियों के संचालन में अधिक लचीलापन आ सकता है। इससे व्यस्त समय में ट्रेनों की आवाजाही व्यवस्थित करने और माल परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना गोंदिया में मुंबई की दिशा के रेल नेटवर्क और जबलपुर में इटारसी-वाराणसी मार्ग से संपर्क को मजबूत करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। 76 लाख टन अतिरिक्त माल परिवहन की संभावना परियोजना पूरी होने के बाद इस रेलखंड पर सालाना करीब 76 लाख टन अतिरिक्त माल परिवहन क्षमता विकसित होने का अनुमान है। उपलब्ध परियोजना विवरण के मुताबिक, इससे माल ढुलाई की लॉजिस्टिक लागत में लगभग ₹350 करोड़ की बचत और कार्बन उत्सर्जन में करीब 16 करोड़ किलोग्राम की कमी आने की संभावना है। निर्माण कार्य के दौरान लगभग 78 लाख मानव दिवस के रोजगार सृजन का भी अनुमान लगाया गया है। ये आंकड़े परियोजना से जुड़े अनुमान हैं; वास्तविक परिणाम परिचालन शुरू होने के बाद स्पष्ट होंगे। पर्यटन, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ बेहतर रेल संपर्क से महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्य प्रदेश के बालाघाट, सिवनी, मंडला तथा जबलपुर जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुविधाजनक हो सकती है। साथ ही, स्थानीय उद्योगों, व्यापारियों, किसानों और माल परिवहन से जुड़े व्यवसायों को भी बेहतर रेल सुविधाएं मिलने की संभावना है। परियोजना में वन्यजीवों और प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े उपायों का प्रावधान भी महत्वपूर्ण रहेगा। Share This Article Post navigation Seva Setu Portal से आम नागरिकों को घर के नजदीक मिलेंगी 900 से अधिक शासकीय सेवाएं EOW ACB Chhattisgarh : आबकारी अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव निलंबित, कोर्ट में पूरक आरोप पत्र दाखिल