Hepatitis-BHepatitis-B
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रायपुर, 13 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / हेपेटाइटिस-B लिवर को प्रभावित करने वाला गंभीर वायरल संक्रमण है। समय पर पहचान और उपचार न होने पर यह लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार टीकाकरण, सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं और समय पर जांच इसके बचाव के सबसे अहम उपाय हैं।

जन्म के बाद टीका सबसे जरूरी

नवजात को जन्म के तुरंत बाद हेपेटाइटिस-B का टीका लगाना संक्रमण से बचाव में बेहद प्रभावी है। आगे की खुराकें भी निर्धारित समय पर पूरी करना जरूरी है।

संक्रमित रक्त और सुई से फैल सकता है

हेपेटाइटिस-B संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन या संक्रमित सुई के दोबारा इस्तेमाल से फैल सकता है। इसलिए रक्त चढ़ाने से पहले उसकी जांच और डिस्पोजेबल सुई का इस्तेमाल जरूरी है।

टैटू-पियर्सिंग में रखें सावधानी

टैटू, पियर्सिंग या अन्य प्रक्रियाओं के दौरान हमेशा स्टेराइल और सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल होना चाहिए। असुरक्षित यौन संबंध से भी संक्रमण फैल सकता है।

संक्रमित मां से बच्चे तक संक्रमण

संक्रमित गर्भवती महिला से प्रसव के दौरान बच्चे में वायरस पहुंच सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित कदम उठाना जरूरी है।

जोखिम वाले लोग कराएं जांच

जिन लोगों में संक्रमण का जोखिम अधिक है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से नियमित जांच करानी चाहिए। संक्रमित व्यक्ति को भी नियमित रूप से लिवर की जांच और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेना चाहिए।

स्वस्थ जीवनशैली भी जरूरी

संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह का पालन लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। जागरूकता, समय पर टीकाकरण और सावधानी से हेपेटाइटिस-B के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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