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रायपुर, 15 अक्टूबर 2026/ ETrendingIndia / हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU), रायपुर ने ‘विधि सारथी – जस्टिस कनेक्ट लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम’ के पहले बैच की शुरुआत की है। इस पहल का दोहरा उद्देश्य वंचित और हाशिए पर मौजूद समुदायों के लिए न्याय तक पहुंच को मजबूत करना तथा युवा वकालत करने वाले वकीलों—विशेष रूप से पहली पीढ़ी के वकीलों—के पेशेवर विकास को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम इन अधिवक्ताओं को नि:शुल्क (प्रो बोनो) कानूनी सेवाओं में सार्थक योगदान देने के साथ-साथ अपने मुकदमेबाजी कौशल और पेशेवर क्षमताओं को निखारने का अवसर प्रदान करता है। इसे छत्तीसगढ़ के पांच जिलों—बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और बलौदा बाजार—में लागू किया जा रहा है, जिसका मुख्य केंद्र वंचित समुदायों तक कानूनी सहायता पहुंचाना और जमीनी स्तर पर न्याय वितरण प्रणाली को सशक्त बनाना है।

इस पहल के तहत एचएनएलयू ने 14 और 15 अक्टूबर 2026 को चयनित लिटिगेशन फेलोज़ के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया। कुलपति एवं परियोजना निदेशक प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन ने फेलोशिप के दोहरे उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए वंचित समुदायों के लिए न्याय तक पहुंच बढ़ाने और युवा वकीलों, विशेषकर पहली पीढ़ी के वकीलों के पेशेवर विकास को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह पहल कानूनी ज्ञान और विशेषज्ञता को सार्थक जनसेवा में बदलने का प्रयास करती है, जिससे नि:शुल्क वकालत को बढ़ावा देकर और युवा वकीलों में पेशेवर व सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित कर छत्तीसगढ़ के सामाजिक-कानूनी विकास में योगदान दिया जा सके। उन्होंने प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व के अभाव को पाटने और युवा अधिवक्ताओं को अपने मुकदमेबाजी कौशल को मजबूत करते हुए हाशिए पर पड़े समुदायों की सेवा करने में सक्षम बनाने के प्रति कार्यक्रम की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

ओरिएंटेशन कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी के मुख्य भाषण से हुआ। इस पहल को कानूनी वकालत को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने वाला एक विशिष्ट प्रयास बताते हुए न्यायमूर्ति भादुड़ी ने समाज के वंचित वर्गों तक कानूनी सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अधिवक्ताओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आर्थिक और सामाजिक बाधाएं लोगों को उचित कानूनी उपचार पाने से नहीं रोकनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सभी फेलोज़ को समर्पण, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता के साथ अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी ने “नि:शुल्क कानूनी सहायता और न्याय तक पहुंच: कानूनी प्रारूपण (ड्राफ्टिंग), अभिवचन (प्लीडिंग्स) और वकालत के व्यावहारिक पहलू” विषय पर एक सत्र को संबोधित किया। यह सत्र मुकदमेबाजी की व्यावहारिक आवश्यकताओं पर केंद्रित था, जिसमें प्रभावी ड्राफ्टिंग, अभिवचनों की तैयारी, अदालत में पैरवी और वादकारियों का प्रतिनिधित्व करने से जुड़ी पेशेवर जिम्मेदारियां शामिल थीं। फेलोज़ को प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं की गहरी समझ विकसित करने, मामलों की पूरी लगन से तैयारी करने और कानूनी अभ्यास में नैतिक तथा मुवक्किल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) दीपक कुमार श्रीवास्तव (प्रभारी कुलसचिव एवं परियोजना प्रभारी शिक्षक), श्री शुभम तोमर (अभियोजन अधिकारी), श्री पार्थ तिवारी (उप सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण), अभिनव के. शुक्ला (सहायक प्राध्यापक एवं प्रभारी शिक्षक), श्री निशांत जैन (कार्यक्रम प्रबंधक) और श्री अनंत प्रताप सिंह (फेलोशिप समन्वयक) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। ये सत्र संवादात्मक और व्यावहारिक थे, जिससे फेलोज़ को बार, बेंच, कानूनी सेवा संस्थानों, अभियोजन सेवाओं और विधि शिक्षा जगत के विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर मिला। चर्चाओं में मुकदमेबाजी की व्यावहारिक चुनौतियां, मुवक्किलों का प्रभावी प्रतिनिधित्व, पेशेवर नैतिकता, प्रक्रियात्मक तैयारी और हाशिए के समुदायों से जुड़े वादकारियों की परिस्थितियों को समझने के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और कानूनी सेवाओं को समाज की जरूरतों के प्रति सुलभ, जिम्मेदार और संवेदनशील बनाए रखते हुए वकालत को मजबूत करने पर मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस पहल को छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से महत्वपूर्ण संस्थागत समर्थन प्राप्त हुआ है, जो राज्य भर के वंचित समुदायों तक न्याय की पहुंच बढ़ाने और प्रभावी कानूनी सहायता प्रदान करने में सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व को दर्शाता है। यह सहयोग कानूनी विशेषज्ञता, संस्थागत तालमेल और समुदाय-उन्मुख विधिक सेवाओं को जोड़ने के कार्यक्रम के व्यापक उद्देश्य को मजबूती प्रदान करता है।

पहले बैच में दस प्रैक्टिसिंग वकील शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पांच जिलों से दो-दो फेलोज़ का चयन किया गया है। चयनित अधिवक्ताओं में से कई पहली पीढ़ी के विधिक पेशेवर हैं, जिससे यह फेलोशिप उनके लिए समुदाय में सीधे योगदान देने के साथ-साथ अपने पेशेवर अनुभव को समृद्ध करने का एक उत्कृष्ट अवसर बन गई है। 18 महीने की इस फेलोशिप अवधि के दौरान प्रत्येक फेलो को प्रतिमाह ₹22,000 का मानदेय दिया जाएगा। ये फेलो जिला एवं सत्र न्यायालयों तथा अन्य अदालतों में नि:शुल्क मुकदमों की पैरवी करेंगे। इस कार्यक्रम का लक्ष्य अपने कार्यकाल के दौरान चिन्हित जिलों में लगभग 1,000 लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाना है।

चयन प्रक्रिया में लगभग 500 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, बार, बेंच और विधि शिक्षा जगत के सदस्यों की एक समिति द्वारा कठोर प्रक्रिया के माध्यम से दस फेलोज़ का चयन किया गया। यह चयन उन वकीलों की पहचान करने की कार्यक्रम की प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो अपनी पेशेवर क्षमताओं के साथ न्याय पाने में आने वाली बाधाओं से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए समर्पित हैं।

पहले बैच के कार्यभार संभालने के साथ ही एचएनएलयू का उद्देश्य समुदाय-उन्मुख कानूनी वकालत में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका को मजबूत करना और छत्तीसगढ़ में नि:शुल्क मुकदमों के दायरे का विस्तार करना है। ‘विधि सारथी – जस्टिस कनेक्ट लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम’ का दूसरा बैच नवंबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है, जो वंचित समुदायों को निरंतर कानूनी सहायता देकर कानूनी शिक्षा, पेशेवर विकास और सामाजिक प्रभाव को जोड़ने के विश्वविद्यालय के प्रयासों को और आगे बढ़ाएगा।


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