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रायपुर / ETrendingIndia / भारत ने हासिल की 500 गीगावाट बिजली क्षमता

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025 — भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है।
देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 500 गीगावाट से अधिक हो गई है।
इसमें से 50% से अधिक ऊर्जा नवीकरणीय और गैर-जीवाश्म स्रोतों से आ रही है।
यह कदम भारत की स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।


नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का योगदान बढ़ा

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल स्थापित क्षमता 500.89 गीगावाट तक पहुँच गई है।
इसमें 256.09 गीगावाट (51%) गैर-जीवाश्म स्रोतों —
जैसे सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा — से है।
वहीं 244.80 गीगावाट (49%) जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन से आती है।


तेज़ी से बढ़ रहा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र

वित्तीय वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में भारत ने
28 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता जोड़ी,
जबकि जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता केवल 5.1 गीगावाट बढ़ी।
यह साफ दिखाता है कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि की गति तेज़ हो रही है।


सौर और पवन ऊर्जा में अग्रणी

भारत में सौर ऊर्जा 127.33 गीगावाट के साथ सबसे आगे है,
जबकि पवन ऊर्जा 53.12 गीगावाट पर है।
यह भारत को वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में अग्रणी बनाता है।

29 जुलाई 2025 को भारत ने इतिहास रचा,
जब कुल बिजली मांग का 51.5% हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा हुआ।
उस दिन सौर उत्पादन 44.50 गीगावाट,
पवन उत्पादन 29.89 गीगावाट और
जलविद्युत उत्पादन 30.29 गीगावाट रहा।


2030 लक्ष्य पाँच वर्ष पहले पूरा

यह पहली बार था जब भारत की आधी से अधिक दैनिक बिजली
हरित स्रोतों से प्राप्त हुई।
विशेषज्ञों ने इसे भारत की ऊर्जा यात्रा का “टर्निंग पॉइंट” बताया।

इस उपलब्धि के साथ भारत ने
COP26 पंचामृत प्रतिबद्धता में से एक प्रमुख लक्ष्य
2030 तक 50% गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता हासिल करने
को पाँच वर्ष पहले ही पूरा कर लिया।


स्वच्छ ऊर्जा से बढ़े रोजगार और आत्मनिर्भरता

सरकारी अधिकारियों के अनुसार,
यह सफलता भारत की वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व को दर्शाती है।
इससे ग्रिड स्थिरता बनी रही और बिजली आपूर्ति विश्वसनीय रही।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार से
उत्पादन, स्थापना, रखरखाव और नवाचार में
नए रोजगार अवसर भी बढ़े हैं,
जिससे शहरी और ग्रामीण युवाओं दोनों को लाभ मिला है।


ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर भारत

ऊर्जा मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)
ने सभी सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी है।
सरकार का लक्ष्य अब भारत को
वैश्विक नवीकरणीय निर्माण और नवाचार केंद्र बनाना है,
ताकि आने वाले दशकों तक सतत विकास सुनिश्चित हो सके।