रायपुर 30 जनवरी 2026 / ETrendingIndia / भारत-EU समझौते से बदलेगा यूरोपीय बाजार का समीकरण
ईयू में गारमेंट निर्यात प्रतिस्पर्धा अब और तेज होने वाली है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता तय हुआ है। इसके अलावा इस समझौते से भारतीय कपड़ा उत्पादों को ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी।
पहले भारतीय परिधानों पर लगभग 12% टैरिफ लगता था। अब यह शुल्क हटने से भारतीय उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। इसलिए यूरोप के खरीदारों के लिए भारत और आकर्षक बन सकता है।
बांग्लादेश के लिए क्यों बढ़ेगी चुनौती
ईयू में गारमेंट निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बांग्लादेश पर सीधा असर पड़ेगा। अभी बांग्लादेश को एलडीसी सुविधा के तहत ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलती है। लेकिन यह लाभ सीमित समय के लिए है।
इसके बाद यदि GSP Plus या नया व्यापार समझौता नहीं हुआ, तो बांग्लादेशी कपड़ों पर भी लगभग 12.5% ड्यूटी लग सकती है। परिणामस्वरूप उसकी कीमत प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है।
यूरोप है बांग्लादेश का सबसे बड़ा बाजार
ईयू में गारमेंट निर्यात प्रतिस्पर्धा का असर इसलिए बड़ा है क्योंकि यूरोप बांग्लादेश का सबसे बड़ा ग्राहक है। कुल गारमेंट निर्यात का आधे से ज्यादा हिस्सा यूरोप जाता है। इसी तरह यह सेक्टर उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
हालांकि शुरुआत में असर सीमित दिख सकता है, लेकिन धीरे-धीरे दबाव बढ़ेगा। उदाहरण के लिए, कीमत को लेकर खरीदार ज्यादा सख्त रुख अपना सकते हैं।
उद्योग जगत ने दी चेतावनी
ईयू में गारमेंट निर्यात प्रतिस्पर्धा को लेकर उद्योग जगत ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को कच्चे कपास, कुशल श्रमिक और सरकारी समर्थन का फायदा मिलेगा। इसलिए कीमत के मामले में भारत मजबूत चुनौती देगा।
अंत में, बांग्लादेश के कारोबारी नेताओं ने इसे चेतावनी माना है। कुल मिलाकर, अब सरकार को तेजी से व्यापार कूटनीति मजबूत करनी होगी। नहीं तो भविष्य में निर्यात मॉडल पर दबाव बढ़ सकता है।
