रायपुर 29 जनवरी 2026 / ETrendingIndia / UNESCO में नामांकन
भारत ने Meghalaya की living root bridges को UNESCO के 2026-27 World Heritage मूल्यांकन चक्र के लिए औपचारिक रूप से नामांकित किया है। इस दस्तावेज़ को भारत के स्थायी प्रतिनिधि Vishal V. Sharma ने UNESCO के वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर के निदेशक Lazare Assomo Eloundou को सौंपा।
सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व
नामित क्षेत्र, जिसे “Jingkieng Jri / Lyu Chrai Cultural Landscape” कहा गया है, Khasi और Jaintia Hills में फैला है। यह क्षेत्र सदियों से आदिवासी समुदायों द्वारा विकसित जीवन्त परंपरा को प्रदर्शित करता है। इसमें लोग, प्रकृति और विश्वास प्रणालियों के बीच गहन संबंध झलकता है।
living root bridges की खासियत
इस nomination का केंद्र बिंदु हैं Meghalaya living root bridges, जो प्राकृतिक समन्वय और Mei Ramew (मदर अर्थ) के प्रति आदिवासी सम्मान का प्रतीक हैं। ये पुल पारंपरिक भूमि प्रबंधन, सामुदायिक शासन और स्थायी पारिस्थितिक संरक्षण को दर्शाते हैं।
भारत की प्रतिबद्धता
Ambassador Vishal Sharma ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, Meghalaya के मुख्यमंत्री, ASI, MEA और स्थानीय समुदायों के योगदान की सराहना की। इस पहल से भारत की UNESCO के माध्यम से वैश्विक सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय भूमिका स्पष्ट होती है।
वैश्विक मान्यता की दिशा
यदि UNESCO इसे World Heritage status प्रदान करता है, तो Meghalaya की living root bridges को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण और पर्यटन के नए अवसर मिलेंगे। यह राज्य और भारत दोनों की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊँचाई देगा।
