Share This Article रायपुर, 01 सितंबर /ETrendingIndia / रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत को भविष्य की चुनौतियों और युद्धों के लिए आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली, तीनों सेनाओं के बेहतर तालमेल और नागरिक-सैन्य समन्वय के साथ तैयार रहना होगा। उन्होंने 1 सितंबर को मानेकशॉ सेंटर में सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज (CENJOWS) की दूसरी वार्षिक ट्राइडेंट व्याख्यान माला में यह बात कही। ‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की ओर संजय सेठ ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर की तकनीक और उत्पाद देश में विकसित कर उनके निर्यात की दिशा में आगे बढ़ रहा है। युवा शक्ति बनेगी भविष्य की ताकत उन्होंने कहा कि भारत के युवा रक्षा, स्टार्टअप, उद्योग, अंतरिक्ष, तकनीक, कृषि और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। अगली पीढ़ी की क्षमता और नवाचार को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना जरूरी है। सेमीकंडक्टर और एडवांस टेक्नोलॉजी पर फोकस रक्षा राज्य मंत्री ने MSME और स्वदेशी उद्योगों की भूमिका की सराहना करते हुए सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीकों में राष्ट्रीय क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा हुआ व्यापक चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। इसमें आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सप्लाई चेन और सूचना की विश्वसनीयता भी शामिल हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में संयुक्त योजना और सैन्य तालमेल के महत्व को रेखांकित किया। 2047 के विकसित भारत के लिए एकीकृत रणनीतिव्याख्यान में सिविल-मिलिट्री फ्यूजन, मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, उभरती तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार आधारित और एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बताई। जनरल अनिल चौहान पर पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री ने “An Era in Olive Green: Gen Anil Chauhan – Duty, Leadership and Legacy” पुस्तक का विमोचन भी किया। पुस्तक में पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के नेतृत्व, सैन्य सुधारों, संयुक्तता और रक्षा परिवर्तन में योगदान को रेखांकित किया गया है। Share This Article Post navigation एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने रक्षा सेवाओं में पहली महिला (गैर-चिकित्सा) दो-सितारा अधिकारी बनकर इतिहास रचा दिव्या मित्तल IAS ने 13 साल बाद दिया इस्तीफा, ग्रामीण भारत की सेवा पर लिखी भावुक पोस्ट