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रायपुर, 23 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क भारत के टेलीकॉम और इंटरनेट सेक्टर में बड़ा धमाका करने की पूरी तैयारी में हैं। मस्क अपनी बहुचर्चित सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ‘स्टारलिंकÓ को भारत में उतारने के लिए लगातार जमीन तैयार कर रहे हैं। इसी बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारत के उन सुदूर और ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का बड़ा विजन साझा किया है, जहां आज भी पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या 4त्र कनेक्टिविटी दम तोड़ देती है।
ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी की खाई पाटने पर नजर

एलन मस्क ने हाल ही में एक पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए साफ किया कि स्टारलिंक का मुख्य फोकस भारत के उन इलाकों तक पहुंचना है, जहां इंटरनेट की पहुंच बेहद सीमित है। उन्होंने जिस रिपोर्ट का हवाला दिया, उसमें बताया गया है कि देश के तमाम गांवों में अब भी स्थिर 4त्र नेटवर्क का अभाव है और शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट डेंसिटी काफी कम है। मस्क का मानना है कि स्टारलिंक सीधे अंतरिक्ष से सिग्नल भेजकर इन दुर्गम इलाकों के डिजिटल अंधेरे को हमेशा के लिए दूर कर सकती है।

बिना मोबाइल टॉवर के कैसे काम करती है यह जादुई तकनीक?

स्टारलिंक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे काम करने के लिए जमीन पर किसी भी तरह के भारी-भरकम मोबाइल टॉवर या ऑप्टिकल फाइबर केबल के जाल की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह से लो अर्थ ऑर्बिट (रुश्वह्र) सैटेलाइट्स पर आधारित इंटरनेट प्रणाली है। इस सर्विस का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ता को केवल अपने घर या इमारत की छत पर एक छोटा सा डिश एंटीना (रिसीवर) लगाना होता है, जो सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स से सिग्नल पकड़कर यूजर को बिजली जैसी तेज इंटरनेट स्पीड मुहैया कराता है।

मंजूरियों का पेंच, त्रद्गठ्ठ-2 सैटेलाइट्स के लिए फिर ठोका दावा

हालांकि, भारत में स्टारलिंक की एंट्री का रास्ता अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है और कंपनी को कई जरूरी सरकारी मंजूरियों का इंतजार है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के चलते स्टारलिंक को हरी झंडी देने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। लेकिन मस्क हार मानने के मूड में नहीं हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने अत्याधुनिक ‘त्रद्गठ्ठ 2Ó सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन की मंजूरी के लिए भारतीय अंतरिक्ष नियामक ‘ढ्ढहृ-स्क्क्रष्टद्गÓ में दोबारा आवेदन किया है। इन नई पीढ़ी के सैटेलाइट्स की खासियत यह है कि ये सीधे मोबाइल डिवाइस से कनेक्ट होने (डायरेक्ट-टू-डिवाइस) की क्षमता भी रखते हैं।


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