Share This Article रायपुर, 18 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से कथित रक्षा जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ होने का मामला सामने आया है। भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के खिलाफ विदेशी खुफिया एजेंसियों, विशेष रूप से चीन से जुड़े संदिग्धों के साथ संवेदनशील और रणनीतिक जानकारी साझा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, संदिग्धों ने सामाजिक माध्यमों पर स्वयं को प्रोफेसर और शिक्षाविद बताकर महिला से संपर्क स्थापित किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला मूल रूप से तेलंगाना की निवासी है और वर्तमान में जम्मू के गांधी नगर क्षेत्र में रहती है। उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धाराओं 3 और 5 तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 152 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी है। खुफिया एजेंसियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्ध विदेशी संचालकों ने बदले हुए नामों से महिला से संपर्क किया था। इसके लिए सामाजिक माध्यमों और कूटबद्ध संदेश भेजने वाले संवाद अनुप्रयोगों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, संदिग्धों ने शुरुआत में स्वयं को अकादमिक शोधकर्ता बताकर महिला को रणनीतिक महत्व के विषयों पर शोध लेख लिखने के लिए कहा। कथित तौर पर शुरुआती दौर में उससे पर्यावरण और वैश्विक भू-राजनीति से संबंधित लेख तैयार करवाए गए। इसके बाद धीरे-धीरे भारतीय रक्षा व्यवस्था और सैन्य अभियानों से जुड़े विषयों पर जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया। खुफिया जानकारी के आधार पर महिला पर आरोप है कि उसने सैन्य प्रतिष्ठानों की तस्वीरें, गोपनीय दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक आंकड़े विदेशी संपर्कों के साथ साझा किए। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी की प्रकृति क्या थी, उसका कितना हिस्सा संवेदनशील था और क्या इससे देश की सुरक्षा को कोई खतरा उत्पन्न हुआ। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि महिला ने यह सामग्री जानबूझकर साझा की या वह कथित संपर्कों के वास्तविक उद्देश्य से अनजान थी। जांच में इन पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3 जासूसी से संबंधित अपराधों से जुड़ी है, जबकि धारा 5 गोपनीय सरकारी सूचनाओं और दस्तावेजों के अनधिकृत संचार से संबंधित है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है। वहीं, धारा 61(2) आपराधिक षड्यंत्र के लिए दंड से जुड़ी है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि महिला कथित विदेशी संपर्कों के संपर्क में कैसे आई, उसके साथ किन लोगों ने संवाद किया और अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी साझा किए जाने की आशंका है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस मामले में अन्य लोग शामिल हैं और क्या किसी गोपनीय सैन्य जानकारी को देश से बाहर भेजा गया। जांच एजेंसियों के लिए इस मामले में कथित संपर्कों की पहचान, संवाद के माध्यमों और संभावित सूचना हस्तांतरण की कडिय़ों का पता लगाना महत्वपूर्ण है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और आरोपों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। Share This Article Post navigation भारतीय सेना का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘अखंड प्रहार-द्वितीय संपन्न