रायपुर / ETrendingIndia / 50 साल पुराने सिद्धांत को मिली नई चुनौती
भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बड़ी वैज्ञानिक खोज की है। इस खोज ने लंबे समय से पढ़ाए जा रहे जैविक सिद्धांत को चुनौती दी। भारतीय वैज्ञानिक नई खोज बैक्टीरिया के जीन नियमन को समझने का तरीका बदल सकती है। इसके अलावा, यह एंटीबायोटिक विकास के लिए भी नए रास्ते खोलती है।
‘सिग्मा साइकिल’ मॉडल पर सवाल
अब तक जीव विज्ञान की किताबों में ‘सिग्मा साइकिल’ मॉडल पढ़ाया जाता था। यह मॉडल बताता था कि सिग्मा फैक्टर ट्रांसक्रिप्शन शुरू होने के बाद RNA पॉलिमरेज़ से अलग हो जाते हैं। लेकिन, नया शोध दिखाता है कि यह मॉडल हर बैक्टीरिया में लागू नहीं होता।
Bacillus subtilis में लगातार जुड़ा रहता है σA
बोस इंस्टीट्यूट और रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि Bacillus subtilis का σA फैक्टर पूरे ट्रांसक्रिप्शन के दौरान RNA पॉलिमरेज़ से जुड़ा रहता है। शोध में यह भी दिखाया गया कि E. coli के संशोधित σ70 में भी ऐसा ही व्यवहार देखने को मिला। इसलिए यह सिद्धांत पहले समझे गए मॉडल से बिल्कुल अलग है।
उन्नत तकनीकों से मिला नया प्रमाण
टीम ने बायोकेमिकल परीक्षण, क्रोमैटिन इम्यूनोप्रिसिपिटेशन और फ्लोरोसेंस इमेजिंग का उपयोग किया। इसके परिणामस्वरूप पता चला कि Bacillus subtilis σA और संशोधित E. coli σ70 ट्रांसक्रिप्शन के दौरान स्थिर रहते हैं। जबकि, पूरा E. coli σ70 कभी भी अलग हो सकता है।
जीन नियमन और एंटीबायोटिक विकास के लिए नए रास्ते
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज जीन नियमन की पूरी समझ बदल सकती है। यह पता चलता है कि बैक्टीरिया तनाव, संक्रमण और वातावरण में बदलावों के प्रति कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। अंत में, भारतीय वैज्ञानिक नई खोज सिंथेटिक बायोलॉजी और एंटीबायोटिक विकास में भी नई संभावनाएँ पेश करती है।
