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रायपुर, 29 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और आर्थिक दबाव के बीच ईरान ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और ऐसी अर्थव्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया है, जो बाहरी दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद मजबूती से चल सके।


मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान को अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक घरेलू उत्पादन पर निर्भर होना चाहिए। जिन वस्तुओं का देश में पर्याप्त उत्पादन नहीं होता, उनका जरूरत के अनुसार समझदारी से आयात किया जाना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में अमेरिकी डॉलर की भूमिका को धीरे-धीरे कम करने पर भी जोर दिया।


उन्होंने इसे ‘प्रतिरोध अर्थव्यवस्थाÓ की नीति का हिस्सा बताया। इस नीति का उद्देश्य ऐसी आत्मनिर्भर आर्थिक व्यवस्था तैयार करना है, जो विदेशी दबाव, प्रतिबंधों और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी लंबे समय तक स्थिर बनी रहे। ईरानी सर्वोच्च नेता ने देश में महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती कीमतों जैसी आर्थिक समस्याओं से निपटने की जरूरत बताई। उन्होंने निवेश बढ़ाने और उसे उत्पादन तथा आर्थिक विकास के लिए जरूरी क्षेत्रों में लगाने पर जोर दिया।


उनका कहना है कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि से देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम की जा सकेगी। उन्होंने अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने को ईरान की आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल का सीधे नाम लिए बिना दोनों देशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ईरान के विरोधी यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी शर्तें स्वीकार करने के बाद ही ईरान आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकता है।


उन्होंने इस सोच को गलत बताया। उनके अनुसार, ईरान के प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों के साथ विदेशी शक्तियां पहले भी अनुचित व्यवहार कर चुकी हैं। ऐसे में उनकी मांगों के आगे झुकना देश की प्रगति का रास्ता नहीं हो सकता। उनका यह बयान अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्टÓ के बीच आया है। इस अभियान के तहत अमेरिका ईरान की वित्तीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ा रहा है।


अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव की कार्रवाई जारी है। अमेरिका ने बैंक मेल्ली की दुबई शाखा के प्रबंधक रजा मोहम्मद ताएदी और हांगकांग की एक कंपनी पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का आरोप है कि संबंधित लोगों और कंपनी ने ईरान से जुड़े व्यक्तियों तथा संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग एवं वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल करने में सहायता की।


अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, बैंक मेल्ली ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स और रक्षा मंत्रालय से जुड़ी प्रतिबंधित संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र रहा है।


इसके अलावा, अमेरिकी वित्त विभाग की वित्तीय अपराध प्रवर्तन शाखा ने बैंक मिस्र संयुक्त अरब अमीरात की अमेरिकी वित्तीय संस्थानों तक पहुंच रोकने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का आरोप है कि यह बैंक ईरानी सरकार को अमेरिकी डॉलर तक पहुंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा है कि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। अमेरिका का कहना है कि वह उन लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाएगा, जो ईरानी सरकार के लिए कथित तौर पर अवैध वित्तीय गतिविधियों में शामिल हैं।


24 अगस्त को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्टÓ शुरू करने की घोषणा की थी। इस अभियान का घोषित उद्देश्य दुनियाभर में ईरान के वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करना और ईरानी सरकार तक पहुंचने वाले धन के स्रोतों को रोकना है।
अमेरिकी प्रतिबंधों और वित्तीय दबाव के बीच ईरान अब घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की रणनीति पर जोर दे रहा है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक टकराव और बढऩे की संभावना है।


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