Share This Article रायपुर, 15 सितंबर। ETrendingIndia / जापान के परमाणु ऑपरेटर क्षेत्र की एक प्रमुख कंपनी चुबू इलेक्ट्रिक पावर के अध्यक्ष किंगो हयाशी और चेयरमैन सटोरू कत्सुनो ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह सामूहिक इस्तीफा भूकंप के खतरों और जोखिमों से जुड़े आंकड़ों में की गई गंभीर हेरफेर और धोखाधड़ी के उजागर होने के बाद आया है। इस डाटा घोटाले के बाद कंपनी ने अपने हामाओका परमाणु संयंत्र में 2 रिएक्टरों को दोबारा शुरू करने के आवेदनों को वापस लेने का फैसला किया है। यह विवाद चुबू इलेक्ट्रिक द्वारा नियामकों को सौंपे गए उन डाटा के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें संयंत्र को होने वाले भूकंपीय खतरों को जानबूझकर कम आंका गया था। इस मामले के खुलासे के बाद अध्यक्ष हयाशी ने गहरा खेद जताते हुए कहा, मैं इस घटना की जिम्मेदारी ले रहा हूं। एक ऐसा संगठनात्मक ढांचा और संस्कृति तैयार न कर पाने के लिए मुझे गहरा पछतावा है, जो हर चीज से ऊपर नियमों के पालन और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हो।एक स्वतंत्र जांच समिति की 250 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि रिएक्टर को दोबारा चालू करने की समीक्षा प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर प्रबंधन का दबाव धोखाधड़ी का कारण था। उच्च अधिकारियों के मानसिक दबाव ने कर्मचारियों में तनाव पैदा कर दिया था। समिति ने रिपोर्ट में कहा, उच्च प्रबंधन द्वारा बनाया गया दबाव ही कर्मचारियों द्वारा किए गए इस गलत आचरण और कदाचार के पीछे के मुख्य कारकों में से एक था। साल 2011 की फुकुशिमा आपदा के बावजूद, जापान अपने देश में परमाणु ऊर्जा को पुनर्जीवित करने के लिए बेहद उत्सुक है।इसके पीछे जापान के 3 मुख्य आर्थिक और कूटनीतिक उद्देश्य हैं। इनमें विदेशी जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम करना। वर्ष 2050 तक पूरी तरह से कार्बन तटस्थता का लक्ष्य हासिल करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते विस्तार के कारण देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना शामिल हैं। Share This Article Post navigation उम्मीद की गाड़ी : 90 लापता बच्चों की तस्वीरों से सजी Porsche …! एक परिवार को मिला खोया हुआ बच्चा…