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रायपुर 14 अप्रैल 2026/ ETrendingIndia / Kedarnath-Badrinath Yatra 2026: New challenges and facilities for devotees / केदारनाथ बद्रीनाथ यात्रा 2026 , उत्तराखंड में इस साल केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम की यात्रा अप्रैल–मई से शुरू होकर अक्टूबर–नवंबर तक चलेगी। इस बार यात्रा में जहां एक ओर कठिनाइयाँ बढ़ेंगी, वहीं कुछ नई व्यवस्थाएं भी राहत देंगी।

केदारनाथ यात्रा: समय ज्यादा, चुनौती भी ज्यादा

रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक का सफर इस बार 3–4 घंटे की जगह 6–7 घंटे तक लग सकता है। रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक का हाइवे जहां राहत बनकर आया है लेकिन वहीं इसके बाद कठिनाइयाँ भी बढ़ी हैं. गुप्तकाशी से आगे सड़कें खराब, संकरी और भूस्खलन प्रभावित हैं। सोनप्रयाग में जाम की समस्या भी बनी रह सकती है।

गौरीकुंड से 16–18 किमी का ट्रेक इस बार और कठिन होगा। कई स्थानों पर 10–20 फीट ऊंची बर्फ के बीच से गुजरना पड़ सकता है। ढीली चट्टानें और स्लाइडिंग जोन यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं।

जरूरी नियम और सुविधाएं

यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। श्रद्धालु घोड़े, पालकी या हेलीकॉप्टर सेवा का भी उपयोग कर सकते हैं। गर्म कपड़े, रेनकोट और जरूरी दवाएं साथ रखना जरूरी है।

बद्रीनाथ यात्रा: बेहतर व्यवस्था से राहत

बद्रीनाथ धाम की यात्रा 4 मई से शुरू होगी और इस बार अपेक्षाकृत आसान मानी जा रही है। प्रशासन ने पहली बार बाईपास सिस्टम लागू किया है, जिससे जाम के बावजूद यात्रा जारी रहेगी।

जोशीमठ के पास कुछ संकरे हिस्सों को छोड़कर बद्रीनाथ तक टू-लेन सड़क से यात्रा सुगम होगी।

यात्रा के लिए सुझाव

मई–जून में भीड़ अधिक रहती है, जबकि सितंबर–अक्टूबर शांत समय होता है। सुबह जल्दी दर्शन करना बेहतर माना गया है। यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।